नई दिल्ली ,05 जुलाई ,। टेक दिग्गज मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर भारत सरकार ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। वॉट्सऐप (ङ्खद्धड्डह्लह्य्रश्चश्च) के बाद अब सरकार ने फोटो और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (ढ्ढठ्ठह्यह्लड्डद्दह्म्ड्डद्व) पर कड़ी कार्रवाई की है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (रूद्गद्बह्लङ्घ) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मेटा के प्रतिनिधियों को तुरंत तलब करें। सरकार का यह सख्त कदम इंस्टाग्राम पर दिखाए जा रहे उन पेड विज्ञापनों को लेकर उठाया गया है, जिनमें कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (ष्टस््ररू) को बढ़ावा दिया जा रहा था। केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस जारी कर ऐसे सभी विज्ञापनों को तुरंत प्लेटफॉर्म से हटाने का सख्त आदेश दिया है। इस हफ्ते यह दूसरा मौका है जब सरकार ने मेटा के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की है।
बीबीसी की जांच में हुआ बड़ा खुलासा, 99 रुपये में बेचा जा रहा था अवैध कंटेंट
दरअसल, बीबीसी (क्चक्चष्ट) द्वारा की गई एक खोजी रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इंस्टाग्राम ने भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन दिखाए। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को सीधे टेलीग्राम (ञ्जद्गद्यद्गद्दह्म्ड्डद्व) चैनलों पर रीडायरेक्ट किया जाता था, जहां कथित तौर पर इस तरह का गैर-कानूनी और आपत्तिजनक कंटेंट महज 99 रुपये में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि विज्ञापनों में संवेदनशील और आपत्तिजनक शब्दों का खुलेआम इस्तेमाल किया गया था। जांच के दौरान बीबीसी ने भारत में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया और पाया कि कुछ ही दिनों के भीतर उस पर इस तरह के संवेदनशील और अवैध टेलीग्राम चैनलों से जुड़े विज्ञापन दिखाए जाने लगे।
मेटा ने दी सफाई- ‘कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होताÓ
हालांकि, इंस्टाग्राम पर लाइव होने वाले सभी विज्ञापनों को मेटा के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी लेनी होती है। लेकिन बीबीसी द्वारा इस गंभीर मामले की ओर ध्यान दिलाए जाने पर शुरुआती प्रतिक्रिया में प्लेटफॉर्म ने कहा था कि ऐसा विज्ञापन उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करता। बाद में जब मामला बढ़ा तो मेटा ने अपनी सफाई में कहा कि दुनिया का कोई भी सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि भले ही उनके रिव्यू प्रोसेस से कुछ पॉलिसी उल्लंघन छूट गए हों, लेकिन वे नियमों को तोडऩे वाले विज्ञापनों के लाइव होने के बाद भी उन्हें सक्रिय रूप से पहचानकर हटाने का काम लगातार करते रहते हैं।
यूजरनेम फीचर को लेकर वॉट्सऐप पर भी गिरी गाज
इससे पहले बुधवार को सरकार ने मेटा के ही मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप के प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचरÓ को लेकर भी कंपनी को एक सख्त नोटिस जारी किया था। सरकार ने चेतावनी दी है कि इस नए फीचर से ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सोनेशन (किसी और की पहचान की नकल करना) जैसे साइबर अपराधों का खतरा काफी बढ़ सकता है। केंद्र ने मेटा को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत संतोषजनक ढंग से पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को लॉन्च करने का काम रोक दिया जाए। सरकार ने यह भी याद दिलाया कि एक प्रमुख सोशल मीडिया इंटरमीडियरी होने के नाते, वॉट्सऐप के लिए आईटी एक्ट (ढ्ढञ्ज ्रष्ह्ल) और उसके नियमों के तहत जरूरी सावधानियां बरतना अनिवार्य है।
पायरेसी को लेकर टेलीग्राम से 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
मेटा के प्लेटफॉर्म्स के अलावा, मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम भी एक बार फिर भारत सरकार के रडार पर आ गया है। नीट (हृश्वश्वञ्ज) पेपर लीक मामले के बाद अब सरकार ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की फिल्मों और ओटीटी (ह्रञ्जञ्ज) कंटेंट की बड़े पैमाने पर हो रही पायरेसी को लेकर टेलीग्राम को नोटिस जारी किया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (रूढ्ढक्च) ने प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वह पायरेटेड फिल्मों और अनऑथराइज्ड कंटेंट के सर्कुलेशन के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाए। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से 15 दिनों के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्टÓ (्रष्ह्लद्बशठ्ठ ञ्जड्डद्मद्गठ्ठ क्रद्गश्चशह्म्ह्ल) मांगी है, जिसमें यह बताने को कहा गया है कि इस समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
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