लखनऊ, 5 जुलाई (आरएनएस ) निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन से राजधानी लखनऊ स्थित एक होटल में शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान उन्होंने वर्ष 2019 में भाजपा और निषाद पार्टी के बीच हुए गठबंधन के समय सामाजिक न्याय और मछुआ समाज से जुड़े जिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी थी, उन्हें विस्तार से रखा।डॉ. संजय निषाद ने कहा कि मछुआ समाज से जुड़ी विभिन्न परंपरागत जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ दिलाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सेंसस मैनुअल-1956 का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति की सूची में शामिल मझवार/तुरैहा के पर्यायवाची समुदायों जैसे केवट, मल्लाह, बिंद, कहार, धीवर, रैकवार, बाथम, निषाद, कश्यप, तरमाली, भर, राजभर, शिल्पकार, कुम्हार और प्रजापति सहित अन्य समान परंपरागत समुदायों को भी उसी आधार पर परिभाषित किया जाए, ताकि उन्हें अनुसूचित जाति का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में शिल्पकार को जातियों के समूह के रूप में मान्यता प्राप्त है, उसी प्रकार मझवार को भी जातियों के समूह के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन मजबूत और अटूट है। उनके अनुसार निषाद पार्टी भगवान श्रीराम के आत्मीय सखा महाराज गुह्यराज निषाद के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी है और उसने हमेशा राजनीति में मर्यादा, अनुशासन तथा सिद्धांतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हर परिस्थिति में गठबंधन धर्म का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया है तथा उसके कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भी भाजपा के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया है।डॉ. निषाद ने कहा कि आज समाज पहले की तुलना में अधिक जागरूक है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में मर्यादा एवं शालीनता बनाए रखते हुए भी अपनी बात प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी को उसके जनाधार, संगठनात्मक क्षमता और गठबंधन के प्रति समर्पण के अनुरूप सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मछुआ समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है तथा कई मामलों में यह अनुसूचित जाति के समुदायों से भी अधिक गंभीर है। उनका आरोप था कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने राजनीतिक कारणों से मछुआ समाज के अधिकारों की अनदेखी की और उन्हें उनके हक से वंचित रखा।डॉ. संजय निषाद ने कहा कि वर्ष 2022 में सरकार गठन से पहले और उसके बाद भी प्रदेश एवं केंद्र नेतृत्व के साथ निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के समायोजन को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई थी। इसी का परिणाम है कि प्रदेश के विभिन्न आयोगों और निकायों में पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां मिली हैं। उन्होंने आग्रह किया कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्हें अवसर नहीं मिल सका है। ऐसे कार्यकर्ताओं का भी विभिन्न आयोगों, निगमों और निकायों में समुचित समायोजन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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