लखनऊ, 5 जुलाई (आरएनएस )। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने एक संवेदनशील मामले का सफल खुलासा करते हुए 16 वर्षीय गुमशुदा किशोरी को जनपद सीतापुर से सकुशल बरामद कर लिया है। मामले में किशोरी को विवाह का झूठा झांसा देकर अपने साथ ले जाने वाले आरोपी सलमान को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।पुलिस के अनुसार थाना मदेयगंज में 18 अप्रैल 2025 को 16 वर्षीय किशोरी की गुमशुदगी के संबंध में मुकदमा संख्या 63/2025 भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) और 87 के तहत दर्ज किया गया था। मामला नाबालिग बालिका से जुड़ा होने और उसकी सुरक्षा को देखते हुए विवेचना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) को सौंप दी गई, ताकि विशेषज्ञ स्तर पर जांच कर किशोरी का पता लगाया जा सके।एएचटीयू ने विवेचना अपने हाथ में लेने के बाद पूरे मामले का नए सिरे से विश्लेषण किया। टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट, तकनीकी साक्ष्य, मानव खुफिया तंत्र, मुखबिरों से प्राप्त सूचनाओं तथा विभिन्न जनपदों की पुलिस इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर लगातार अभियान चलाया। वैज्ञानिक तरीके से प्रत्येक सुराग की जांच के बाद 29 जून 2026 को सीतापुर जनपद के महमूदाबाद थाना क्षेत्र स्थित संकटा देवी मंदिर के पास से किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया गया।पूछताछ के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 के अंतर्गत दर्ज बयान में किशोरी ने बताया कि आरोपी ने उससे विवाह करने का झूठा आश्वासन देकर उसे अपने साथ ले गया था। इसके बाद वह उसे अपने गांव ले गया, जहां उसे अपने परिवार के साथ रखा गया और उससे भीख मंगवाई जाती थी। पुलिस के अनुसार बरामदगी के समय भी किशोरी संकटा देवी मंदिर के आसपास भीख मांगने पहुंची हुई थी।विवेचना के दौरान प्राप्त साक्ष्यों और पीडि़ता के बयान के आधार पर 1 जुलाई 2026 को आरोपी सलमान पुत्र हरीशन, निवासी बसंतपुर, थाना बड्डूपुर, जनपद बाराबंकी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई और बाद में न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।बरामदगी के बाद किशोरी को सुरक्षित संरक्षण में लेकर उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। नियमानुसार उसका बयान दर्ज किया गया तथा बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर उसे राजकीय बाल गृह में सुरक्षित रखा गया। पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव ने बताया कि एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को ऐसे मामलों की जांच सौंपी जाती है, जिनमें विशेषज्ञ और बहुआयामी अन्वेषण की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यूनिट डिजिटल तकनीक, तकनीकी साक्ष्यों, मानव खुफिया तंत्र और अंतरजनपदीय समन्वय के माध्यम से प्रत्येक मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच करती है। उद्देश्य केवल गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाना और यदि किसी प्रकार का अपराध हुआ हो तो दोषियों को कानून के दायरे में लाना भी है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट द्वारा अब तक कुल 10 गुमशुदा बच्चों को सकुशल बरामद कर उनके परिजनों से मिलाया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी तथा महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार संवेदनशील, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।
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