लखनऊ 5 जुलाई (आरएनएस )। आम आदमी पार्टी (आप) के उत्तर प्रदेश के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रदेश सरकार और लखनऊ विद्युत आपूर्ति प्रशासन (लेसा) पर बिजली उपभोक्ताओं के साथ “संगठित आर्थिक लूट” करने का आरोप लगाया है। रविवार को जारी बयान में उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के करीब 47 लाख तथा लखनऊ के लगभग 12 लाख बिजली उपभोक्ताओं के कनेक्शनों का स्वीकृत भार बिना आवेदन, बिना सहमति और बिना किसी पूर्व सूचना के बढ़ा दिया गया है। उन्होंने इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर आम आदमी पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।वंशराज दुबे ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिजली व्यवस्था में सुधार करने के बजाय सीधे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का रास्ता चुना है। उन्होंने कहा कि लाखों उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड एकतरफा बढ़ाकर उनसे अधिक बिजली शुल्क वसूलने की तैयारी की गई है। उनका कहना था कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के कनेक्शनों का भार बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे अधिक असर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा। उनके अनुसार जिन उपभोक्ताओं के पास एक किलोवाट का कनेक्शन था और जो लाइफ लाइन श्रेणी के अंतर्गत सरकारी रियायतों के पात्र थे, उनका भार बढ़ाकर दो किलोवाट कर दिया गया है। इससे ऐसे परिवार लाइफ लाइन श्रेणी से बाहर हो सकते हैं और उन्हें मिलने वाली सब्सिडी तथा अन्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।आप नेता ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग ने अपने ही नियमों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार किसी उपभोक्ता का स्वीकृत भार तभी बढ़ाया जा सकता है, जब निर्धारित अवधि तक उसके यहां स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली भार का उपयोग दर्ज हो और नियमानुसार पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए। लेकिन इस मामले में बिना तकनीकी परीक्षण, बिना नोटिस और बिना उपभोक्ता की सहमति के लाखों कनेक्शनों का भार बढ़ा दिया गया, जो उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है।वंशराज दुबे ने कहा कि प्रदेश में लगातार ट्रांसफार्मर जलने, लो-वोल्टेज और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। उनका आरोप था कि सरकार को ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, नए ट्रांसफार्मर लगाने और बिजली उत्पादन तथा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ट्रांसफार्मर खुद वेंटिलेटर पर हैं, लेकिन इलाज जनता की जेब का किया जा रहा है।”उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा सरकार प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर सकी है। भीषण गर्मी के दौरान बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, ट्रांसफार्मरों के बार-बार खराब होने और लंबे ब्लैकआउट की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर लोगों को नौ-नौ घंटे तक बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है, जबकि सरकार के मंत्री समाधान प्रस्तुत करने के बजाय केवल बयानबाजी कर रहे हैं।वंशराज दुबे ने कहा कि बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आम उपभोक्ताओं की समस्याओं का वास्तविक अनुभव नहीं है, क्योंकि उन्हें सरकारी आवासों में निर्बाध बिजली, जनरेटर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। उनका कहना था कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक बिजली व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।उन्होंने दिल्ली और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आम नागरिकों को सस्ती और रियायती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया, जबकि उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं पर लगातार नए आर्थिक बोझ डाले जा रहे हैं।आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ने मांग की कि लखनऊ के लगभग 12 लाख और पूरे प्रदेश के करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ाया गया स्वीकृत भार तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। साथ ही जिन गरीब परिवारों को इस निर्णय के कारण लाइफ लाइन श्रेणी से बाहर किया गया है, उन्हें पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो आम आदमी पार्टी प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी और बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक संघर्ष करेगी।अपने बयान के अंत में वंशराज दुबे ने एक शेर पढ़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था की वास्तविक समस्या जर्जर ट्रांसफार्मर, कमजोर वितरण तंत्र और अपर्याप्त विद्युत प्रबंधन है, लेकिन इन कमियों को दूर करने के बजाय सरकार जनता पर अतिरिक्त भार डालकर उसी को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं के साथ खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
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