नैनी इलाके में धड़ल्ले से चल रहा दूसरों की जमीन पर कब्जा कर बेचने का कारोबार
9 जुलाई (आरएनएस ) प्रयागराज। यमुना नगर के करछना तहसील अंतर्गत ग्राम चकहीरानन्द में भू-माफियाओं द्वारा सरकारी और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा कर उन्हें बेचने का एक गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र के दबंगों पर सरकारी चकमार्गों को गायब करने, सीमा चिन्हों को नष्ट करने और एक पीडि़त की पैतृक भूमि पर छलपूर्वक कब्जा कर उसे जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर पीडि़त ने प्रशासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है।
प्राप्त विवरण के अनुसार करछना क्षेत्र के पनासा गांव निवासी कपिल देव द्विवेदी ने बताया कि नैनी कोतवाली क्षेत्र के चकहीरानन्द में अजय कुमार मिश्र, सुजीत कुमार मिश्र और श्रीमती सुनीता मिश्र निवासी नैनी गांव द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि की प्लाटिंग का कार्य किया जा रहा है। कपिल देव का आरोप है कि प्लाटिंग के दौरान इन व्यक्तियों ने नियमों को ताक पर रखकर ग्राम समाज के चकमार्ग संख्या-3, 16, 24, 26, 30, 37, 46, 53, 61, 68 और 74 पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। इन सरकारी रास्तों की जमीनों को प्लाटिंग का हिस्सा बनाकर आम जनता को बेच दिया गया और सभी पुराने सीमा चिन्हों (मेड़ व पत्थर) को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, उक्त आरोपी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और उनके खिलाफ पूर्व में भी कई मुकदमे दर्ज हैं।
चकमार्गों के अतिरिक्त, इन लोगों ने कपिल देव की निजी भूमि पर भी शोरेपुश्ती के बल पर कब्जा कर लिया है। पनासा गांव निवासी कपिलदेव द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने नैनी कोतवाली क्षेत्र के चकहीरानन्द में स्थित आराजी संख्या 8 (रकबा 90 वर्गमीटर) और आराजी संख्या 6 (रकबा 70 वर्गमीटर), कुल रकबा 160 वर्गमीटर के पंजीकृत बैनामा कराया है और संक्रमणीय भूमिधर हैं। सरकारी अभिलेखों में भी उनका नाम दर्ज है।
आरोप है कि उक्त भू-माफियाओं ने पीडि़त की इस 160 वर्गमीटर जमीन को भी अपनी बताकर दूसरों को बेच दिया। जब पीडि़त ने इसका विरोध किया, तो उन्हें धमकी दी गई कि “अभी तो जमीन गायब हुई है, अब तुम भी गायब हो जाओगे। पीडि़त कपिल देव ने इस मामले में मार्च 2019 से उपजिलाधिकारी करछना के यहां राजस्व संहिता की धारा-24 के तहत नाप का मुकदमा (कपिल देव बनाम सरकार) दाखिल कर रखा है, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक शिथिलता के कारण जमीन की नाप नहीं हो सकी। पीडि़त द्वारा तहसील दिवस और थाना दिवस पर दिए गए दर्जनों प्रार्थना पत्रों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
मामले में नया मोड़ दिसंबर 2025 में आया, जब आरोपी अजय कुमार मिश्र ने पीडि़त से संपर्क कर विवादित भूमि के बजाय दूसरी जगह 105 वर्गमीटर जमीन छोडऩे की बात कही और वहीं निर्माण करने की सलाह दी। इस आश्वासन पर भरोसा करके पीडि़त कपिलदेव द्विवेदी ने उस स्थान पर पिलर खड़े कर नींव भरवाई, सेफ्टी टैंक बनवाया और बोरिंग का काम शुरू करवाया। इस निर्माण कार्य में पीडि़त के लगभग सात लाख रुपये खर्च हो चुके थे। आरोप है कि इसके बाद बीते दिन आरोपी अजय कुमार मिश्र अपने साथ कई अज्ञात लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे और चल रहे निर्माण कार्य को जबरन बंद करवा दिया। जब पीडि़त ने इस अन्याय का कारण पूछा, तो आरोपियों ने उन्हें हथियार के बल पर डराया और धमकी दी कि यदि दोबारा निर्माण कार्य शुरू किया, तो जान से मार दिए जाओगे।
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