नई दिल्ली,11 जुलाई(आरएनएस)। भारतीय वायुसेना ने वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता का एक बार फिर प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। विश्व आधुनिक सैन्य विमान निर्देशिका (डब्ल्यूडीएमएमए) द्वारा जारी वैश्विक वायु शक्ति सूचकांक-2026 में भारतीय वायुसेना को दुनिया की छठी सबसे शक्तिशाली वायुसेना का दर्जा मिला है। इस रैंकिंग में भारत ने चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है, जबकि पाकिस्तान काफी पीछे 18वें स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार 103 देशों की 129 सैन्य वायु इकाइयों तथा 48,082 सैन्य विमानों के अध्ययन के आधार पर यह रैंकिंग तैयार की गई है। इसमें भारत को 69.4 अंक प्राप्त हुए हैं। चीन 63.8 अंकों के साथ सातवें, जापान 58.1 अंकों के साथ आठवें तथा पाकिस्तान 46.3 अंकों के साथ 18वें स्थान पर है।
रैंकिंग में पहले स्थान पर 242.9 अंकों के साथ अमेरिका की वायुसेना है। दूसरे स्थान पर अमेरिका की नौसेना की वायु शाखा (142.4 अंक), तीसरे स्थान पर रूस की वायुसेना (114.2 अंक), चौथे स्थान पर अमेरिका की थलसेना की वायु शाखा (112.6 अंक) तथा पांचवें स्थान पर अमेरिका की समुद्री सेना की वायु शाखा (85.3 अंक) को स्थान मिला है। शीर्ष दस में इजरायल नौवें और फ्रांस दसवें स्थान पर हैं।
डब्ल्यूडीएमएमए किसी भी देश की वायुसेना की ताकत का आकलन केवल विमानों की संख्या के आधार पर नहीं करता। इसके लिए वह वास्तविक मूल्यांकन अंक प्रणाली का उपयोग करता है, जिसमें 60 से अधिक मानकों पर वायुसेना का मूल्यांकन किया जाता है।
इसमें विशेष मिशन विमान, हवा में ईंधन भरने वाले विमान, भारी परिवहन विमान, हवाई सुरक्षा व्यवस्था, आक्रमण क्षमता, आधुनिक प्रशिक्षण विमान, रसद व्यवस्था, युद्धकाल में ईंधन, गोला-बारूद और कलपुर्जों की उपलब्धता, 24 घंटे में उड़ान भरने के लिए तैयार विमानों की संख्या तथा परिचालन क्षमता जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।
रिपोर्ट में यह भी देखा जाता है कि किसी देश के बेड़े में चौथी, साढ़े चौथी अथवा पांचवीं पीढ़ी के कितने आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण माना जाता है कि संबंधित देश अपने लड़ाकू विमान और उनके कलपुर्जों का निर्माण स्वयं करता है या आयात पर निर्भर है।
भारत के पास राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और मिराज-2000 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। यद्यपि भारतीय वायुसेना के पास अभी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान नहीं हैं, फिर भी स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता और भविष्य की योजनाओं ने उसके कुल मूल्यांकन को मजबूत किया है।
रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास लगभग 3,733 सैन्य विमान हैं, जिनमें जे-20, जे-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और एच-6 जैसे रणनीतिक बमवर्षक विमान शामिल हैं। इसके मुकाबले भारत के पास लगभग 1,716 सैन्य विमान हैं।
इसके बावजूद भारतीय वायुसेना को चीन से बेहतर स्थान मिला है। इसका प्रमुख कारण उसकी उच्च परिचालन क्षमता, अनुभवी पायलट, संतुलित विमान बेड़ा, सामरिक भौगोलिक स्थिति और युद्धक तैयारी को माना गया है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी विशेषता उसके लड़ाकू विमानों की विविधता, संतुलित संरचना, प्रभावी प्रशिक्षण प्रणाली तथा विभिन्न सैन्य अभ्यासों और अभियानों का अनुभव है। यही कारण है कि अपेक्षाकृत कम विमानों के बावजूद भारत ने इस वैश्विक रैंकिंग में चीन और पाकिस्तान दोनों को पीछे छोड़ दिया।
हालांकि, अन्य सैन्य आकलनों में केवल विमानों की संख्या को अधिक महत्व दिए जाने के कारण चीन कई बार भारत से आगे दिखाई देता है, लेकिन डब्ल्यूडीएमएमए का यह सूचकांक समग्र युद्धक क्षमता, तैयारी और संचालन दक्षता को अधिक महत्व देता है। इसी आधार पर भारतीय वायुसेना ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है।
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