पौधों की सुरक्षा भगवान भरोसे
एक पेड़ मां के नाम वृक्षारोपण अभियान में नीम, पीपल, पाकड़, बरगद जैसे पारम्परिक पेड़ो का रोपण हो
प्रयागराज,11 जुलाई (आरएनएस )। वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नामÓ वृक्षारोपण अभियान की जमीनी हकीकत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन उचित रणनीति और देखरेख के अभाव में यह महत्वाकांक्षी योजना सिर्फ कागजी आंकड़ों और ‘तस्वीरें खिंचवानेÓ का जरिया बनकर रह गई है।
पूर्व सांसद ने अभियान की गंभीर कमियों को उजागर करते हुए सरकार को इसे सफल बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं। रेवती रमण सिंह ने कहा कि हर साल मानसून में रिकॉर्ड तोड़ पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन रोपण के बाद उनकी सुरक्षा के लिए न तो ट्री-गार्ड लगाए जाते हैं और न ही गर्मियों में पानी देने की कोई व्यवस्था होती है। नतीजा यह होता है कि 80 फीसदी से अधिक पौधे कुछ ही महीनों में सूख जाते हैं या मवेशियों का निवाला बन जाते हैं।
उन्होंने तकनीकी खामियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मिट्टी और स्थानीय जलवायु का अध्ययन किए बिना कहीं भी कोई भी पौधा रोप दिया जा रहा है। विदेशी या अनुपयुक्त प्रजातियों के पौधे लगाने से स्थानीय जैव विविधता को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के पास सिर्फ पौधे लगाने का लक्ष्य होता है। पौधा लगाने के बाद वह जीवित रहा या नहीं, इसकी ऑडिटिंग या जियो-टैगिंग की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने कहा कि पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने सुझाव दिया कि एक वर्ष तक गोद लेने की नीति बने सरकार केवल पौधा न बांटे, बल्कि संबंधित विभाग या उस व्यक्ति को उस पौधे की कम से कम एक वर्ष तक देखरेख और सुरक्षा (ट्री-गार्ड व पानी) की जिम्मेदारी सौंपे।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

