लखनऊ,11 जुलाई(आरएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहले चरण में प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं। इन पुस्तकालयों में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो सामग्री, डिजिटल क्विज और लगभग 20 हजार डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों की सुविधा मिलेगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को शहरों जैसी अध्ययन सुविधाएं गांवों में ही उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक और भौगोलिक बाधाएं उनकी सफलता के मार्ग में रुकावट न बनें।पंचायतीराज विभाग के अनुसार पहले चरण में 32 जिलों की ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। प्रत्येक लाइब्रेरी को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जहां विद्यार्थी पारंपरिक पुस्तकों के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से भी अध्ययन कर सकेंगे। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी होगी।सरकार ने प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी के विकास पर लगभग चार लाख रुपये खर्च किए हैं। इसमें लगभग दो लाख रुपये की लागत से प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य अध्ययन से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 1.30 लाख रुपये के सूचना प्रौद्योगिकी उपकरण तथा करीब 70 हजार रुपये की लागत से आधुनिक फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। इन सुविधाओं के माध्यम से ग्रामीण छात्रों को डिजिटल शिक्षा का बेहतर वातावरण मिलेगा।पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि डिजिटल लाइब्रेरी में विद्यार्थियों को 20 हजार से अधिक डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो सामग्री, इंटरैक्टिव क्विज और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित अध्ययन सामग्री शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ते हुए उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता को मजबूत बनाना है, जिससे वे राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।योजना के तहत अब तक 10,406 ग्राम पंचायतों की लाइब्रेरियों में पुस्तकें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जबकि 9,372 ग्राम पंचायतों में आधुनिक फर्नीचर की आपूर्ति भी पूरी हो चुकी है। विभाग द्वारा चरणबद्ध तरीके से सभी लाइब्रेरियों को डिजिटल संसाधनों से जोडऩे का कार्य भी किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पुस्तकालय और डिजिटल लर्निंग की सुविधा मिल सके।सरकार ने इन डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को सौंपी है। संबंधित सहायक अधिकारी नियमित रूप से इनकी निगरानी करेंगे, जिससे पुस्तकालयों का संचालन सुचारु रूप से हो सके और विद्यार्थियों को सभी सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलेगी।अयोध्या, प्रयागराज, गोरखपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, आगरा, कानपुर देहात, गौतम बुद्ध नगर, बांदा, गाजियाबाद, शाहजहांपुर, देवरिया, हरदोई, शामली, एटा, सहारनपुर, फिरोजाबाद, कौशांबी, प्रतापगढ़, वाराणसी, ललितपुर, अमरोहा, कासगंज, इटावा, फर्रुखाबाद, बुलंदशहर, श्रावस्ती, रामपुर, लखीमपुर खीरी, जौनपुर, संभल और उन्नाव सहित 32 जिलों की ग्राम पंचायतों में पुस्तकों और आधुनिक फर्नीचर की शत-प्रतिशत आपूर्ति पूरी की जा चुकी है।सरकार का कहना है कि डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगी। इस पहल से गांवों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध होगी, जिससे वे उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगे और रोजगार के नए अवसरों तक उनकी पहुंच मजबूत होगी।
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