-30 मीटर की अड़चन से थमा डक्ट,नाली निर्माण सहित सड़क चौड़ीकरण
मूलभूत सुविधाएं नदारद, 33 दुकानों के गुपचुप आवंटन की तैयारी में जुटा विकास प्राधिकरण
अयोध्या ,11 जुलाई(आरएनएस)। रामनगरी की हृदयस्थली राम की पैड़ी के सामने भजन संध्या स्थल के बगल पार्किंग पर सड़क चौड़ीकरण और दुकानों के निर्माण की करोड़ों रुपये की परियोजना लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) के बीच समन्वय की कमी का शिकार होती नजर आ रही है। सरयू के पुराने पुल से लता मंगेशकर चौक तक करीब 300 मीटर सड़क चौड़ीकरण कार्य होना था, लेकिन लगभग 30 मीटर का सड़क चौड़ीकरण डक्ट और नाली का का निर्माण रुकने से पूरी योजना अधूरी रह गई है।परियोजना के तहत लगभग चार करोड़ रुपये की लागत से 33 दुकानों का निर्माण कराया गया है। हालांकि इनमें अभी तक बिजली आपूर्ति, अंडरग्राउंड शिफ्टिंग, पानी निकासी और नाली,सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं आधी अधूरी हैं। इसके बावजूद विकास प्राधिकरण द्वारा दुकानों के मूल्यांकन और आवंटन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अधूरी सुविधाओं के बीच दुकानों का आवंटन होने पर भविष्य में दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी की अधिशासी अभियंता एस.पी. भारतीय का कहना है कि संबंधित दुकानें विकास प्राधिकरण की हैं। विभाग ने कई बार संपर्क किया, लेकिन दुकानें खाली न होने के कारण चौड़ीकरण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। उनका दावा है कि दुकानें खाली होते ही मुआवजा प्रक्रिया पूरी कर करीब 15 दिन में शेष कार्य पूरा कर लिया जाएगा। वहीं विकास प्राधिकरण के सचिव आर.के. मिश्रा का कहना है कि विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास के लिए नजूल भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। भूमि उपलब्ध होते ही दुकानों का निर्माण कराकर विस्थापित दुकानदारों को समायोजित कर दिया जायेगा।हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि डेढ़ वर्ष से भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिससे परियोजना लगातार लटकी हुई है। दीपोत्सव जैसी विश्वस्तरीय आयोजन स्थल राम की पैड़ी के सामने विकास कार्यों का अधूरा रहना और सुविधाएं पूरी किए बिना दुकानों के आवंटन की तैयारी प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। प्राधिकरण के ही कई लोगों का कहना है कि विशाल सिंह और सत्येंद्र सिंह का समय होता तो यह चौड़ीकरण 30 दिन में हो जाता केवल विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण परियोजना लटकी हुई है।सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री और शासन की समीक्षा में इस प्रोजेक्ट का जिक्र होने से भी बचा जाता है।
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