कहा- ‘एक व्यक्ति के कारण डूबी 213 सीटें जीतने वाली पार्टीÓ
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में आज उस वक्त एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस के सबसे कद्दावर व रंगीनमिजाज नेताओं में शुमार पूर्व मंत्री और कमरहाटी से विधायक मदन मित्रा ने भी पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के सभी बड़े पदों को छोडऩे के तुरंत बाद विधानसभा पहुंचकर विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय से उनके कक्ष में मुलाकात की, जिसने बंगाल की राजनीति में एक नए समीकरण की सुगबुगाहट तेज कर दी है। मदन मित्रा आज सुबह अपने घर से खुद कार ड्राइव करते हुए सीधे पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे। विपक्ष के कमरे में हलचल: विधानसभा पहुंचते ही वे बिना देर किए सीधे विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के कक्ष में दाखिल हुए और उनसे लंबी मुलाकात की।
विपक्ष के नेता के कक्ष में मीडिया कैमरों के सामने मदन मित्रा बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने टीएमसी के नेतृत्व पर सीधा और तीखा निशाना साधते हुए कहा, “जीवन के इस पड़ाव पर आकर मुझे सही और गलत के बीच में से किसी एक को चुनना पड़ा है।”
मदन मित्रा ने बेहद आक्रामक अंदाज में आरोप लगाया, “भविष्य में जब बंगाल के इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा, तब सुनहरे अक्षरों में यह भी दर्ज होगा कि आखिर कैसे सिर्फ एक व्यक्ति के अहंकार और मनमानी की वजह से जनता द्वारा 213 सीटें जिताकर भेजी गई इतनी बड़ी पार्टी (टीएमसी) का भारी राजनीतिक नुकसान हुआ।” मदन मित्रा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संगठन के तमाम पदों से नाता तोड़ लिया है, लेकिन वे जनता के प्रतिनिधि बने रहेंगे।
उन्होंने टीएमसी राष्ट्रीय समिति के चीफ व्हिप, वर्किंग कमेटी (कार्यकारिणी) और पार्टी के महासचिव समेत सभी संगठनात्मक पदों से तत्काल इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने साफ किया कि वे अभी भी तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं और बंगाल की जनता के प्रतिनिधि के तौर पर काम करते रहेंगे। उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है।
हालांकि, बगावत के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया और लंबे समय तक साथ काम करने के लिए उनका आभार जताया।

