नई दिल्ली, ,21 जुलाई ,(आरएनएस)। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एकाग्रता, दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास के महत्व को रेखांकित करते हुए मंगलवार को एक प्रेरणादायी संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास और समर्पित प्रयास से एकाग्रता तथा इच्छाशक्ति को निरंतर विकसित और सशक्त बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए लिखा—
एकाग्रताथ सङ्कल्प: स्नायुवद् वर्द्धनक्षमौ।
नित्याभ्यासप्रयोगाभ्यामधिकाधिकमृध्यत:॥
इस सुभाषितम् का भावार्थ स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एकाग्रता और संकल्प हमारे स्नायु तंत्र की भांति हैं। नियमित अभ्यास और सही प्रयासों के माध्यम से इन्हें विकसित और मजबूत बनाया जा सकता है। समय के साथ ये दोनों और अधिक दृढ़ तथा प्रभावशाली बनते जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के माध्यम से यह प्रेरणा दी कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि निरंतर अभ्यास, समर्पण और अटूट इच्छाशक्ति भी उतनी ही आवश्यक होती है। उन्होंने संकेत दिया कि नियमित प्रयासों से व्यक्ति अपनी मानसिक क्षमता, एकाग्रता और संकल्प शक्ति को निरंतर बेहतर बना सकता है।
प्रधानमंत्री का यह प्रेरक संदेश विद्यार्थियों, युवाओं, पेशेवरों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लक्ष्य हासिल करने का प्रयास कर रहे लोगों के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है।
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