नई दिल्ली/पणजी, ,21 जुलाई ,(आरएनएस)। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग (डीआईबीडी) ने गोवा सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के सहयोग से पणजी में ‘भाषिनी राजयम: राज्य सहभागिता कार्यशालाÓ का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को बढ़ावा देना तथा भाषा आधारित डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं के ढांचे को सशक्त बनाना था। इस पहल के माध्यम से विशेष रूप से कोंकणी भाषा में एआई आधारित डिजिटल शासन और नागरिक सेवाओं को विस्तार देने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार, पर्यटन, मुद्रण एवं स्टेशनरी मंत्री श्री रोहन ए. खौंटे, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, स्टार्टअप संस्थापक और भाषा विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला ने डिजिटल शासन को अधिक समावेशी, सरल और बहुभाषी बनाने के लिए सरकार तथा विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
कोंकणी भाषा को डिजिटल पहचान देने पर जोर
कार्यशाला में कोंकणी भाषा पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए बताया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा तकनीकें नागरिकों को उनकी मातृभाषा में सरकारी सेवाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आवश्यक सूचनाओं तक सहज पहुंच उपलब्ध करा सकती हैं। वक्ताओं ने कहा कि बहुभाषी एआई ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जहां भाषा किसी भी सरकारी सेवा तक पहुंच में बाधा नहीं बल्कि सुविधा का माध्यम बनेगी।
भाषिनी के बहुभाषी एआई समाधानों का प्रदर्शन
डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ नाग ने अपने संबोधन में भाषा-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के लिए भाषिनी की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि भाषिनी शासन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और नागरिक सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में तेजी से अपनी उपयोगिता साबित कर रही है। उन्होंने कोंकणी सहित क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटल विकास के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप और भाषा विशेषज्ञों के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय भाषा प्रौद्योगिकी केंद्र (एनएचएलटी) के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को भाषिनी ऐप मित्र, भाषिनी मित्र और भाषिनी वक्ता जैसे एआई आधारित समाधानों से परिचित कराया गया। इन सत्रों में एआई आधारित अनुवाद, वाक् पहचान (स्पीच रिकग्निशन), टेक्स्ट-टू-स्पीच, लिप्यंतरण और बहुभाषी एपीआई जैसी तकनीकों के सरकारी सेवाओं में उपयोग का प्रदर्शन किया गया।
लाइव डेमो से दिखाई एआई की क्षमता
भाषिनी टीम ने अपने एआई आधारित भाषा समाधानों का लाइव प्रदर्शन करते हुए बहुभाषी वाक् तकनीक, अनुवाद, प्रतिलेखन और दस्तावेज आधारित सेवाओं की कार्यप्रणाली प्रदर्शित की। बताया गया कि इन तकनीकों के माध्यम से नागरिकों और पर्यटकों दोनों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और सार्वजनिक सूचनाओं तक अपनी पसंदीदा भाषा में सरल और निर्बाध पहुंच उपलब्ध कराई जा सकती है।
कोंकणी भाषा के डिजिटल इकोसिस्टम को मिलेगा विस्तार
कार्यशाला के विशेष सत्र में सरकार, शिक्षाविदों, भाषा विशेषज्ञों और तकनीकी साझेदारों ने कोंकणी भाषा के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। इसमें भाषा डेटासेट का विस्तार, एआई मॉडलों को और बेहतर बनाने तथा राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बहुभाषी एआई आधारित उपयोग विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया।
ओपन माइक सत्र में शासन, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और नागरिक सेवाओं में बहुभाषी एआई के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। साथ ही गोवा सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म में भाषिनी के एकीकरण पर भी विचार किया गया, ताकि नागरिकों को अधिक समावेशी और भाषा-केंद्रित डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
मुख्यमंत्री और मंत्री ने बताया महत्वपूर्ण कदम
गोवा के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रोहन ए. खौंटे ने कहा कि भाषिनी राजयम कार्यशाला एआई-संचालित और समावेशी डिजिटल गोवा के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के साथ साझेदारी का उद्देश्य भाषा संबंधी बाधाओं को समाप्त करना है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक भी कोंकणी भाषा में डिजिटल सेवाओं का सहज लाभ उठा सकें।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ नाग ने बताया कि कार्यशाला में एक आवाज आधारित डिजिटल यात्रा का प्रदर्शन किया गया, जिसमें दिखाया गया कि भाषिनी का बहुभाषी एआई इकोसिस्टम किस प्रकार नागरिकों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं और सहायता प्रणालियों से उनकी अपनी भाषा में जोड़ सकता है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले भाषा डेटासेट तैयार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे कोंकणी भाषा में एआई आधारित डिजिटल सेवाओं के विकास को नई गति मिलेगी।
800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन
डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग भारत सरकार का बहुभाषी एआई आधारित राष्ट्रीय मंच है। वर्तमान में भाषिनी 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन प्रदान कर रहा है और 8 अरब से अधिक एआई अनुमानों को सक्षम बना चुका है। यह प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक एआई अनुमानों का प्रसंस्करण करता है तथा 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वाक् भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है। इस पहल का उद्देश्य भाषा आधारित एआई तकनीकों के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।
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