अजय दीक्षित
कांग्रेस, राजद, वीआइपी और सीपीएम ने बिहार विधानसभा चुनावों में 11 स्थानों पर जैसे वैशाली, कहलगांव, शिवहर, चैनपुर तथा अन्य 7 पर आपस में महागठबंधन होते हुए उम्मीदवार उतार दिए हैं। और लड़ाई को फ्रेंडली फाइट नाम दिया है।इन विधानसभा चुनावों में एनडीए का उम्मीदवार अलग से है ही। बताया जाता है इन 11 स्थानों के अलावा राजद, कांग्रेस नेता एक दूसरे के खिलाफ खूब प्रचार कर रहे हैं और राहुल गांधी,राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े हाथ पर हाथ रख कर बैठे हुए हैं। उल्लेखनीय हैं कि बिहार विधानसभा चुनावों में राजद 141, कांग्रेस 62, वीआईपी 12, सीपीएम 19 सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। फ्रेंडली फाइट में 5 सीट पर राजद और कांग्रेस,चार सीट पर कांग्रेस और वीआईपी,दो सीट पर कांग्रेस और सीपीएम आमने सामने हैं। इस सर्कस को फ्रेंडली फाइट कहते हैं। बिहार के शिवहर से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि ये सब उनके प्रभाव वाले क्षेत्र मध्य बिहार में हो रहा है। पप्पू यादव ने कहा है कि उन्होंने राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, मुकेश साहनी से बातचीत की लेकिन किसी ने नहीं मानी और लिस्ट जारी कर दी। हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने बताया है कि महागठबंधन में
कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। जबकि सामने एनडीए जैसा प्रतिद्वंद्वी है जो व्यवस्थित चुनाव लड़ रहा है उन्होंने हम पार्टी के जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा को मना लिया और पत्ता नहीं खड़का, जेडीयू भी 101 पर राजी हो गया और भारतीय जनता पार्टी ने अधिक से कम सीट पर समझौता कर लिया।
ये फ्रेंडली फाइट शब्द डब्ल्यूडब्ल्यूएफ कुश्ती से आया है। जिसमें खली लड़ता था और राजनीति में बंगाल से आया जब 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और तृणमूल में संघर्ष हुआ और कांग्रेस ने इतने वोट काटे कि दस सीट पर
भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की।दरअसल बिहार में कांग्रेस को राजद की वैशाखी की जरूरत है यह सिलसिला 1991 से चल रहा है। लेकिन अब तेजस्वी यादव इसे आधे अधूरे मन से चला रहे हैं। कांग्रेस 2020 के चुनावों में 70 सीट पर लड़ी थी और केबल 19 पर जीत हासिल हुई।जबकि राजद 125 पर लड़ा और 74 पर जीत हुई । तेजस्वी का मानना था कि कांग्रेस के कारण वे सत्ता में नहीं आ पाए
हालांकि नीतीश कुमार ने बीच में पलटा खा कर तेजस्वी यादव को उप मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया था लेकिन नीतीश कुमार अधिक समय तक उन्हें झेल नहीं सके तब नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटी मारी और 2024 के लोकसभा से पहले एनडीए में शामिल हो गए।
राजद और कांग्रेस का महागठबंधन भी कमजोर है 11 सीट पर फ्रेंडली फाइट हो रही है और इन सीटों पर महा गठबन्धन
गच्चा खा सकता है।2020 के चुनावों में 4०० हजार वोट के फर्क से एनडीए सत्ता में आ गया था।
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