-जिला अस्पताल के निष्प्रयोज्य वार्ड में मरीज को तालिबानी सजा देने का मामला आया सामाने
अयोध्या 9 नवंबर (आरएनएस)। जिला अस्पताल में निष्प्रयोज्य वार्ड में एक मरीज को तालिबानी सजा देने का मामला सामने आया है। वार्ड में मरीज का हाथ-पैर बेड से बांधकर जबरन लेटा दिया गया और उसके सामने भोजन से सजी थाली रख दी। वह भोजन की थाली की तरफ देखकर घंटों तड़पता रहा। आंखों से आंसू निकलते रहे। इतना सब होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन की आंखों का पानी मरा रहा। कोई भी उसे झांकने तक नहीं आया, बल्कि उसे इस कदर छिपाकर रखा गया, ताकि किसी की नजर न पड़े। चिकित्सा अधीक्षक ने भी इसे अमानवीय कृत्य बताते हुए गलत बताया है। अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड में एक बरामदा है। बरामदे में भी आठ से 10 बेड बिछाए गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियर की तरफ से इस बरामदे को निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। सख्त हिदायत दी गई कि बरामदे में किसी भी मरीज को भर्ती न किया जाए। इस बरामदे में शनिवार को एक अज्ञात मरीज को चारों तरफ से ढक कर लेटाया गया था। पट्टियों से उसके दोनों हाथ व पैर बांधे गए थे। उसके सामने रखी गई भोजन की थाली में दाल, सब्जी व दो रोटियां थीं। वह भोजन को एकटक निहारे जा रहा था। आंखों से लगातार आंसू टपक रहे थे। उससे बात करने का प्रयास किया गया तो वह कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। अस्पताल में मिली जानकारी के अनुसार भर्ती मरीज को श्रीराम चिकित्सालय से जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। उसे ई-रिक्शा से यहां लाया गया था। कहते हैं कि मानसिक रूप से बीमार था। गद्दे व चद्दर फाड़ रहा था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय चौधरी ने शुक्रवार को राउंड के दौरान पीडि़त को दर्शन नगर स्थित मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में रेफर करने के लिए कहा था, संभवत: स्टाफ ने यह नहीं किया। आरोप है कि दोबारा पीडि़त पर किसी की नजर न पड़े। इसलिए स्टाफ ने पीडि़त को निष्प्रयोग बरामदे में हाथ-पैर बांधकर लेटा दिया, क्योंकि वहां कोई भी राउंड करने नहीं जाता।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि बरामदा तो निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। वहां किसी भी मरीज को भर्ती ही नहीं करना चाहिए था। इसके साथ ही किसी का हाथ पैर बांधना गलत है। स्टाफ ने बताया कि किसी संस्था से भी बात की गई थी, लेकिन कोई आया नहीं। हालांकि स्टाफ को चेतावनी दी गई है। जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि मुझे सुबह जानकारी मिली थी कि कोई मरीज गद्दे फाड़ रहा था। भागने की कोशिश कर रहा था। उसे रेफर तो करना ही था, लेकिन कोई एंबुलेंस वाला नहीं आया। उसके कृत्यों को देखकर उसका हाथ-पैर बांधना ही सही था। उसे मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में रेफर कराया जा रहा है।
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