भारत में पहली बार बाइपास हार्ट सर्जरी वाल्व व सीआरटी-डी मशीन लगाई एक साथ
मेरठ 11 नवंबर (आरएनएस )। भारत में पहली बार एक साथ गया किया बाइपास-हार्ट सर्जरी वाल्व को चेंज और सीआरटी-डी ऑपरेशन आपको धकधक गर्ल माधुरी दीक्षित का वो गाना तो याद होगा ना जिसमें उन्होंने कहा था कि धक-धक करे ये जिया। जी हां हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग हमारा दिल होता है, और जब इसी की धड़कनें रुकने लगती हैं तो हम और आप जाते हैं डॉक्टर्स के पास। इसी दिल के इलाज में मेरठ ही नहीं एनसीआर की प्रसिद्ध युनिवर्सिटी स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के ह्रदय सर्जरी विभाग ने छत्रपति शिवाजी सुभारती अस्पताल के साथ मिलकर एक नया कीर्तिमान बनाया है।
यहां के हृदय सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अंकुर अग्रवाल और उनकी टीम ने एक अड़सठ वर्षीय रोगी के खराब वाल्व को काटकर चमड़े का नया आर्टिफिशियल वाल्व को लगाने और दिल की धड़कनों को सामान्य रखने के लिए सीआरटी-डी सर्जरी की प्रक्रिया को एक साथ अंजाम दिया। बता दें कि ऐसे मरीजों में उनकी एओर्टिक खराब होने की वजह से मरीज को सीने में दर्द और साँस फूलने जैसी तकलीफें होती हैं। इस मामले में भी मरीज को ऐसी ही समस्या थी और ये परेशानी इतनी पुरानी थी कि इलाज न मिल पाने के कारण मरीज का दिल सिफऱ् 20त्न ही काम कर रहा था।
इस मरीज़ का इलाज करते हुए सुभारती मेडिकल कॉलेज के हृदय सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर की टीम ने ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा पहले तो खऱाब वॉल्व को काटकर चमड़े का कृत्रिम वॉल्व लगाया। इसके बाद मरीज की जाँच करने पर पता चला कि मरीज़ की धड़कन की तारों की भी परेशानी थी जिससे दिल के दोनों तरफ के हिस्से साथ में नहीं धड़क रहे थे। ऐसे में मरीज़ को बायपास के बाद भी अचानक धड़कन रुकने का बहुत बड़ा खतरा होता है।
गौरतलब हो कि ये दोनों ही ऑपरेशन में जान का खतरा होता है और भारत में पहले कभी ये दोनों ऑपरेशन साथ में नहीं किए गए हैं। सुभारती अस्पताल ने इस मरीज़ का बायपास कर और सीआरटी-डी मशीन को एकसाथ लगाकर इस ऑपरेशन को सफलता पूर्वक संपन्न किया। कार्डिएक एनिस्थिसिया एवं आईसीयू इंचार्ज डॉ जगदीश की देखरेख में मरीज़ को एक हफ़्ते में स्वस्थ हाल में घर भेज दिया गया।बताते चलें कि सुभारती अस्पताल में सभी तरह की हार्ट बाईपास सर्जरी, फेफड़ों की सर्जरी और खून की नसों का इलाज सभी नई तकनीक द्वारा सफलता पूर्वक किया जा रहा है।
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