मेरठ 11 नवंबर (आरएनएस ) दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार शाम हुए ब्लास्ट में मारे गए मेरठ निवासी मोहसिन का शव जब मंगलवार को मेरठ पहुंचा, तो परिवार के बीच माहौल बेहद गमगीन हो गया। मोहसिन मूल रूप से लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के शाहजहां कॉलोनी का रहने वाला था। वह बीते दो साल से अपनी पत्नी सुल्ताना और दो बच्चों के साथ दिल्ली के दरियागंज इलाके में रह रहा था, जहां वह ई-रिक्शा चलाकर रोजमर्रा की कमाई करता था और परिवार का भरण-पोषण करता था।
मोहसिन की मौत की खबर ने परिवार को झकझोर दिया। उसकी मां और रिश्तेदारों में रो-रोकर बुरा हाल हो गया। लेकिन परिवार की पीड़ा वहीं और गहरी हो गई, जब अंतिम संस्कार करने यानी दफनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। शव मेरठ पहुंचने के बाद मोहसिन की पत्नी सुल्ताना ने ससुराल की दहलीज पार करने से इंकार कर दिया। वह एंबुलेंस में ही बैठी रही और अपने पति के शव को दिल्ली में ही दफनाने की जिद पर अड़ी रही। दूसरी ओर, मोहसिन के पिता और भाइयों का कहना था कि बेटे को उसके पैतृक घर मेरठ में दफनाया जाए। घंटों तक मोहसिन की मां, बहनें और परिजन सुल्ताना को समझाते रहे। माहौल बेहद भावुक था-कहीं चीखें, कहीं सन्नाटा, और बीच में एक गहरा पारिवारिक दर्द। पत्नी सुल्ताना का कहना था-हमने दो साल से दिल्ली में घर बनाया है, बच्चे वहीं पल रहे हैं। वह वहीं कमाता था, वहीं उसका घर और जिंदगी थी, उसे वहीं दफनाया जाएगा।
जब काफी देर तक कोई समाधान नहीं निकल सका, तो परिजनों ने गुस्से में शव उठाने से इनकार कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और आपसी संवाद से अंतिम फैसला लेने की अपील की।
फिलहाल पुलिस पत्नी और मोहिसन के माता पिता को समझाने का प्रयास कर रही थी कि इसी बीच बदर अली मौके पर पहुंच गए और मोहसिन के जनाजे को उठवाकर ले जाने लगे। इसके बाद पुलिस ने जनाजे को बीच में ही रोक दिया। कहा कि पत्नी और परिवार की सुलह के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की जाएगी। फिलहाल मौके पर तनातनी की स्थिति है।
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