ग्रामीण क्षेत्रों में महिला प्रसव की सुविधाओं में हुआ अभूतपूर्व विस्तार
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित सीजेरियन प्रसव में प्रयागराज मंडल अव्वल, संपादित हुए 1569 सीजेरियन प्रसव
प्रयागराज 19 नवंबर (आरएनएस )। मुख्यमंत्री की दूरदर्शी योजनाओं से उत्तर प्रदेश के जान जीवन में लगातार सुधार हो रहे हैं। इसी कड़ी में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सरकार सतत प्रयास कर रही है। जननी सुरक्षा योजना इसी का एक हिस्सा है जो संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देती है जिससे मातृ और नवजात मृत्यु दर में तेजी से कमी आई है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के विभिन्न अभिनव प्रयासों से प्रदेश में प्रयागराज मंडल इसमें अग्रणी रहा है।
उत्तर प्रदेश में शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इससे मातृ दर और नवजात मृत्यु दर में कमी आई है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के जननी सुरक्षा योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आने वाले स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को प्रथम संदर्भ इकाई ( एफआरयू ) माना गया है। यही एफआरयू यह ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ प्रदान करता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रयागराज के मंडलीय परियोजना प्रबंधक हरित सक्सेना बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रयागराज मंडल के 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव सुविधा होने के कारण इन्हें प्रथम संदर्भन यूनिट (एफआरयू) बनाया गया । वित्तीय वर्ष 2024-25 के सापेक्ष 2025-26 में 1017 ऑपरेशन अधिक हुए हैं। 2024-25 में जहां 552 ऑपेरशन हुए थे, वहीं इस वित्तीय वर्ष में यह संख्या अक्टूबर तक बढ़कर 1569 हो गयी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 अप्रैल, 2025 से 20 अक्टूबर, 2025 तक जनपद प्रयागराज में सर्वाधिक 689, प्रतापगढ़ में 428 कौशाम्बी में 285 जनपद फतेहपुर में 167 सुरक्षित सीजेरियन प्रसव कराए गए हैं।
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स्वास्थ्य सुविधाओं में हुए अभिनव प्रयास
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी अवसंरचना में सुधार किया है। सभी जनपदों में शहरी क्षेत्र की सुविधाओं का दबाव कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक केंद्रों की स्थापना की गई है। मंडल में 19 सामुदायिक केंद्रों की स्थापना के बाद यहां चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की प्राथमिकता में तैनाती की गई है। ऑपरेशन की सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ऑन लाइन डॉक्टर्स की सुविधा भी पहली बार इन क्षेत्रों में की गई है। इन्ही अभिनव प्रयासों के चलते मण्डल के जनपदों के एफआरयू पर सीजेरियन ऑपरेशन की संख्या में वृद्धि हुई है। इसी के साथ ही मातृ-शिशु स्वास्थ्य प्रणाली की गुणवत्ता के एक और मापक सी सेक्शन रेट में भी मंडल में भारी कमी आई है। प्रसव के कुल ऑपरेशन में सिजेरियन ऑपरेशन का प्रतिशत ही सी सेक्शन रेट है जो यह बताता है कि अस्पतालों में प्रसव सेवाएँ कैसी हैं, डॉक्टर और सुविधा उपलब्ध हैं या नहीं, जटिल प्रसवों को सुरक्षित तरीके से संभाला जा रहा है या नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन 10 से 15 के बीच का सी सेक्शन रेट आदर्श मानता है। प्रयागराज मंडल में इस समय यह 8 से 9 फीसदी है।
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