प्रयागराज 19 नवंबर (आरएनएस )। जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज में ‘वल्र्ड फिलासफी डेÓ के अवसर पर आइक्यूएसी, दर्शनशास्त्र एवं राजनीतिशास्त्र के संयुक्त तत्वावधान में एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दीन दयाल चेयर के प्रो मधुरेंद्र कुमार रहे। व्याख्यान का विषय था ‘उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेशÓ।
कार्यक्रम का उद्देश्य नई शिक्षा नीति 2020 में वर्णित भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को बताने के साथ ही इसका प्रयोग उच्च शिक्षा में करना था। प्राचार्या प्रो आशिमा घोष ने जीवन दायिनी पौधा एवं स्मृति चिन्ह देकर मुख्य अतिथि का स्वागत किया एवं कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करके शिक्षा व्यवस्था को और भी समृद्ध बना सकते हैं। प्रो मधुरेंद्र कुमार ने नैक के मूल्यांकन के लिए आवश्यक मानदंडों को बताया। भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक आयाम हैं जैसे चिकित्सा, संगीत, शिल्प कलाएं, स्थापत्य कला, कूटनीति, धातुकर्म आदि जिनका प्रयोग करके हम अपनी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक उपयोगी बना सकते हैं। यह एक पूर्ण मनुष्य का निर्माण करती है। यह प्रज्ञान पर आधारित है। हमारे ग्रंथों में अथाह ज्ञान है जिसका प्रयोग करके बालक का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। यह जीवन के मौलिक प्रश्नों पर विचार करती है। छात्राओं ने अनेक प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं को व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ फातिमा नूरी ने किया। आइक्यूएसी की कोऑर्डिनेटर डॉ कस्तूरी भारद्वाज ने महाविद्यालय में एनएएसी से संबंधित जानकारी साझा कीं एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकायें एवं छात्राएं उपस्थित रहे।
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