बल्दीराय/सुल्तानपुर 19 नवंबर (आरएनएस )। तहसील के उत्तरी-पश्चिमी इलाके में सड़कें विकास नहीं, बल्कि उपेक्षा, भ्रष्टाचार और सौतेले राजनीतिक व्यवहार की जिंदा तस्वीर पेश कर रही हैं। क्षेत्र के प्रमुख संपर्क मार्ग इतने जर्जर हो चुके हैं कि उनसे गुजरना किसी दुर्घटना का न्योता माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि भाजपा विधायक सुरेश पासी ने विधानसभा के इस हिस्से को विकास योजनाओं से लगातार अनदेखा किया, जिसके चलते आज यहां का सड़क तंत्र ‘विकास विहीन कोनाÓ बन गया है।
संपर्क मार्गों की हालत: गड्ढों में दफन विकास
गिरजा मोड़ से कुमारगंज (अयोध्या बॉर्डर) तक जाने वाली मुख्य सड़क आज डामर नहीं, गड्ढों की लंबी कतार बन चुकी है। बरसात में जलभराव और गर्मियों में धूल का गुबार, दोनों ही हालात में यह सड़क यात्रियों की परेशानी और हादसों का कारण बनती है। इसी तरह हंसुई मुकुंदपुर से अमाएं (अयोध्या सीमा) तक जाने वाला मार्ग वर्षों से बिना मरम्मत के टूटा पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रास्ते पर डामर होना अनिवार्य है।सड़क के गड्ढे एवं धूल यात्रियों को परेशान किए हैं।
भवानीगढ़ से डीह और चार नंबर–मेघमऊ होकर बल्दीराय तक पहुंचने वाली सड़क भी विधानसभा सीमा तक इतनी उखड़ी हुई है कि मोटरसाइकिल सवार से लेकर चारपहिया चालक तक, हर कोई हादसे के डर से धीमे चलने पर मजबूर है।
अरवल–बरामऊ–डीह मार्ग की स्थिति तो इतनी खराब है कि स्थानीय लोग इसे ‘गड्ढों का गलियाराÓ कहने लगे हैं।
फोरलेन रोड , तिरहुँती मोड से फत्तेपुर की सड़क बद से बदतर हैं ।जो सड़क के विकास की खुली किताब है ।
-स्कूली छात्र, मरीज और आम जनता हर रोज जोखिम में
हादसों का खतरा इन रास्तों पर हमेशा मंडराता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बीमार व्यक्तियों और रोज़मर्रा के काम से निकलने वाले यात्रियों को झेलनी पड़ती है। कई बार एम्बुलेंस तक इन सड़कों पर फंसकर देर से अस्पताल पहुंची है। हादसे होने के बावजूद, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी जनता के गुस्से को बढ़ा रही है।
-विकास केवल भाषणों में? जनता में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि भाजपा सरकार के विकास के दावे कागजों और प्रचार की दीवारों पर तो दिखते हैं, लेकिन धरातल पर यह क्षेत्र अब भी अविकसित और उपेक्षित है।विधायक कुछ चाटुकारों के चंगुल में होने से आमजन की इस प्रमुख समस्या से दूर रहे हैं।
जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क सुधार और विकास कार्य शुरू नहीं किए गए, तो आने वाले चुनाव में इसका जवाब वोट से दिया जाएगा।
अब सवाल यह है— क्या विकास सड़क पर उतरेगा, या फिर पोस्टरों और भाषणों में ही चमकता रहेगा?
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