लखनऊ 19 नवंबर (आरएनएस )। खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक मंगलवार को राज्यमंत्री सतीश चन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में धान और मोटे अनाजों की खरीद, किसानों को भुगतान की स्थिति, क्रय केंद्रों की कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत चल रहे विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद, आयुक्त अनामिका सिंह, वित्त नियंत्रक कमलेन्द्र कुमार, सम्भागीय खाद्य नियंत्रक अशोक कुमार पाल सहित धान क्रय संस्थाओं और विपणन शाखा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।समीक्षा के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 4171 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 3360 केंद्रों पर खरीद कार्य शुरू हो गया है। 18 नवंबर 2025 तक कुल 67024 किसानों से 3.95 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.33 लाख मीट्रिक टन था। किसानों को अब तक लगभग 852 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराया जा चुका है। धान की कुल खरीद के सापेक्ष 79112 मीट्रिक टन धान राइस मिलों को भेज दिया गया है, जबकि 78967 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड चावल केंद्रीय पूल में जमा कराया गया है।
मोटे अनाजों की खरीद में इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब तक 13672 किसानों से 64435 मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ढाई गुना से अधिक है। इसके अतिरिक्त 1391 किसानों से 4978 मीट्रिक टन ज्वार तथा 806 किसानों से 3371 मीट्रिक टन मक्का की खरीद की जा चुकी है। किसानों को बाजरा खरीद के एवज में 168.39 करोड़ रुपये, ज्वार के लिए 16.68 करोड़ रुपये तथा मक्का के लिए 7.32 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा के साथ ही राज्यमंत्री सतीश चन्द्र शर्मा ने अधिकारियों को क्रय कार्य में पारदर्शिता, सुगमता और गति सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्रय योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई जाए और उन्हें ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पंजीकरण के ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्यापन की प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। जिन परिवारों की भूमि संयुक्त रूप से है और कुछ सदस्य बाहर रहते हैं, उनके लिए नामिनी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि धान के सत्यापन और खरीद में कोई बाधा न आए।राज्यमंत्री ने क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने आदेश दिया कि सभी क्रय केंद्र समय से खोले जाएँ और किसानों के बैठने, पेयजल और अन्य जरूरतों की समुचित व्यवस्था की जाए। मंडल और जनपद स्तरीय अधिकारियों को प्रतिदिन क्रय केंद्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्रय केंद्र पर दैनिक खरीद बढ़ाते हुए प्रतिदिन कम से कम 200 क्विंटल खरीद सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भीड़ को नियंत्रित करने और प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए आवश्यकतानुसार टोकन व्यवस्था लागू की जाए।बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि मण्डियों में स्थापित क्रय केंद्र मण्डी गेट के निकट ही लगाए जाएं, ताकि किसानों को अतिरिक्त भ्रमण न करना पड़े। राज्यमंत्री ने चेतावनी दी कि धान खरीद में अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारियों और पर्यवेक्षणीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पीसीएफ, पीसीयू और यूपीएसएस जैसी क्रय एजेंसियों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर पर नहीं है, इसलिए इन एजेंसियों को दैनिक खरीद बढ़ाने और केंद्र प्रभारियों की उपस्थिति की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करनी होगी।बैठक में यह संदेश स्पष्ट रहा कि सरकार किसानों के हित, समयबद्ध भुगतान, सुगम खरीद प्रक्रिया और पारदर्शी व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। विभाग की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि क्रय कार्य सुचारू रूप से चले और अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके, इसके लिए सभी आवश्यक कदम तत्काल प्रभाव से उठाए जाएंगे।
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