विकासनगर,22 नवंबर (आरएनएस)। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को आदर्श राजकीय प्राथमिक विद्यालय डाकपत्थर में नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिक्षकों बताया कि एनीमिया से ग्रस्त लोगों की पहचान कर एनीमिया मुक्ति के अभियान में सभी को सहयोग करना चाहिए। इसके लिए परीक्षण करवाकर कर एनीमिया मुक्ति अभियान में शामिल होने का काम करें। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व राष्ट्रीय किशोर कार्यक्रम के तहत इस अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक डॉ. अमित कटियार ने शिक्षकों को बताया कि भारत सरकार ने कुपोषण और विशेषकर एनीमिया जैसी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से निपटने के लिए ‘एनीमिया मुक्त भारतÓ अभियान की शुरुआत 2018 में की थी। बताया कि एनीमिया को खत्म करने की कोशिशों के बावजूद ये लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है और हाल के दशकों में इसकी व्यापकता लगातार बढ़ रही है। डॉ. कंचन रावत ने शिक्षकों को बताया कि एनीमिया कमज़ोरी, थकान, सांस लेने में परेशानी, पीले रंग, ठंडे हाथ-पैर, चक्कर आना, तेज़ी से दिल धड़कना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे लक्षणों के ज़रिए दिखाई देता है। बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें डॉ. के पास ले जाना चाहिए, जिससे समय पर उपचार शुरु हो सके। डॉ. कंचन ने बताया कि एनीमिया से बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मांस, बीन्स, सूखे मेवे, मटर, मूंगफली, अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, सोया और फोर्टिफाइड अनाज, खट्टे फल, टमाटर, ब्रोकली, स्ट्रॉबेरी का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही धूम्रपान, शराब से दूर रहते हुए नियमित व्यायाम को जीवन शैली को अपना जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से अभियान को सफल बनाने मे सहयोग देने को कहा।
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