धमतरी, 24 नवम्बर (आरएनएस)। धमतरी जिले में कृषि उत्पादन को स्थायी एवं संतुलित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर महोदय के निर्देशन में फसल चक्र परिवर्तन अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। खरीफ एवं रबी दोनों मौसम में धान की भरपूर पैदावार होने और सिंचाई के लिए नहरों एवं लगभग 30 हजार नलकूपों पर निर्भरता के कारण बढ़ते जल संकट को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने फसल विविधिकरण को प्राथमिकता दी है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखण्डों में फसल चक्र परिवर्तन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। लगभग 50 गांव शत-प्रतिशत फसल चक्र अपनाने की दिशा में तैयार हो चुके हैं। कृषि विभाग की मैदानी टीम द्वारा सतत् प्रचार-प्रसार, कृषकों से व्यक्तिगत संपर्क एवं गांव-गांव जागरुकता गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। सभी विकासखण्डों में कम से कम 10-10 ग्राम पंचायतों को पूर्ण फसल चक्र अपनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उप संचालक कृषि मोनेश साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा किसानों को ग्रीष्मकालीन धान की जगह अन्य दलहनी-तिलहनी, लघु धान्य एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव पारित कर फसल चक्र को संस्थागत रूप देने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। विगत वर्ष परसतराई, रांवा एवं पचपेड़ी गांवों को शत-प्रतिशत फसल चक्र अपनाने पर सम्मानित किया गया था। इस वर्ष रबी 2025-26 में भी ऐसे गांव जहां धान के स्थान पर दलहनी-तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाया जाएगा, उन्हें भी प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा। फसल चक्र परिवर्तन को गति देने हेतु समितियों एवं ग्रामों में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को ऋण वितरण, बीज वितरण, बीज उत्पादन एवं विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है। जिले के 44 प्राथमिक साख सहकारी समितियों में बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध
वर्तमान में समितियों में—
93.20 क्विंटल गेहूं
347.70 क्विंटल चना
23.10 क्विंटल तिवड़ा
16.40 क्विंटल सरसों
कृषकों से अपील है कि वे अपने नजदीकी सहकारी समितियों एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन प्राप्त करते हुए बीज उठाव करें। बीज उत्पादन में शामिल कृषकों को बीज प्रसंस्करण केंद्र में अनिवार्य रूप से पंजीयन करवाने हेतु भी प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन का यह प्रयास जिले में कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं जल-संरक्षणोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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