लखनऊ 28 नवंबर (आरएनएस ),बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में आज ‘भारतीय न्याय संहिता के संदर्भ में साइबर अपराध: जेन-ज़ी/युवा वर्ग मेंÓ विषय पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, 20 यूपी गल्र्स बटालियन एनसीसी, 67 यूपी बटालियन एनसीसी और सेंटर फॉर पोस्ट ग्रेजुएट लीगल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति प्रो. एस. विक्टर बाबू ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आईजेटीआर लखनऊ की डिप्टी डायरेक्टर इंद्रेश उपस्थित रहीं।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। कुलगीत के पश्चात अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया गया। मंच संचालन सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक कैप्टन (डॉ.) राजश्री ने किया। प्रो. प्रीति मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया।कार्यवाहक कुलपति प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अब जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। मोबाइल, ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया और डिजिटल दस्तावेजों के बढ़ते उपयोग के बीच यदि सतर्कता न बरती जाए तो डेटा चोरी, पहचान की जालसाजी, वित्तीय धोखाधड़ी और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने साइबर सुरक्षा को जिम्मेदार, जागरूक और सुरक्षित डिजिटल नागरिकता की मूल आवश्यकता बताया।मुख्य अतिथि इंद्रेश ने साइबर सुरक्षा के तीन सिद्धांत—”डोंट क्रिएट, डोंट शेयर और डू रिपोर्ट”—पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री तैयार करने या साझा करने से न केवल सामाजिक संकट बढ़ता है बल्कि यह कई बार कानूनी अपराध भी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने युवाओं को चेताया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, डिजिटल धोखाधड़ी या साइबर अपराध को तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म या अधिकारियों को रिपोर्ट करना चाहिए। वास्तविक केस-स्टडीज़ के आधार पर उन्होंने बताया कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े वित्तीय और मानसिक नुकसान का कारण बन सकती है।राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. अमनदीप सिंह ने कहा कि साइबर जगत की जटिलताओं के बीच आईटी एक्ट जैसे कानूनों का विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार समाज में व्यवस्था जरूरी है, उसी प्रकार साइबर स्पेस में भी एक सुव्यवस्थित डिजिटल अनुशासन का पालन होना चाहिए, ताकि हर नागरिक तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग कर सके।अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के कम्प्यूटर इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. चंदन कुमार ने साइबर सुरक्षा के तीन स्तंभ—प्रोटेक्शन, प्रीवेंशन और एश्योरेंस—पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मजबूत पासवर्ड, डबल-स्टेप ऑथेंटिकेशन, प्राइवेसी सेटिंग्स और संदिग्ध लिंक से बचाव जैसे उपायों को डिजिटल सुरक्षा का आधार बताया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सकारात्मक डिजिटल आदत है, जिसे अपनाकर ही युवा वर्ग अपने डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बना सकता है।कार्यक्रम के दौरान एक कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में आईएनए न्यूज की एडिटर-इन-चीफ विजय लक्ष्मी सिंह जादौन और विशिष्ट अतिथि के रूप में वितु क्लब हरदोई की अध्यक्ष अमिता मिश्रा उपस्थित रहीं। कवि विनय आशु, अनुराग मिश्र, विपिन मलिहाबादी, चेतराम अज्ञानी, मुकेश और गीतकार मुरली परिहार ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बनाया।कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। पूरे आयोजन ने डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए युवा पीढ़ी को साइबर अनुशासन और जिम्मेदारी का मजबूत संदेश दिया।
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