लखनऊ 28 नवंबर (आरएनएस )। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सुधारों और नवोन्मेषी फैसलों के बीच ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। छह वर्षों से बिजली की दरें न बढ़ाने और उदार बिजली बिल राहत योजना लागू किए जाने के बाद अब प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 27 नवम्बर को 1 गीगावाट अर्थात 1000 मेगावाट रूफटॉप सौर क्षमता का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश के 2.90 लाख घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली है। साथ ही लगभग चार हजार एकड़ भूमि की बचत भी हुई है, जिसका उपयोग अन्य विकास कार्यों में किया जा सकेगा।स्थापित सौर संयंत्रों पर उपभोक्ताओं को भारत सरकार की ओर से लगभग दो हजार करोड़ रुपये तथा प्रदेश सरकार की ओर से छह सौ करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इस आर्थिक सहायता ने आम परिवारों के लिए सौर ऊर्जा को अपनाना बेहद सरल बना दिया है। बड़ी संख्या में घरों के बिजली बिल में अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। कई परिवारों के दिन के समय बिजली बिल लगभग शून्य हो जाते हैं और अतिरिक्त सौर उत्पादन को ग्रिड में उपलब्ध कराने पर उपभोक्ताओं को राजस्व क्रेडिट भी मिल रहा है।योजना के प्रारम्भिक चरण में जहां मात्र 81 विक्रेता पंजीकृत थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 4200 तक पहुंच गई है। विक्रेताओं की इस व्यापक वृद्धि से सौर संयंत्रों की स्थापना की गति में तीव्रता आई है और व्यापार तथा उद्यमिता के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। उत्पादन, स्थापना, अनुरक्षण तथा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में लगभग पचास हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार मिला है।इस उपलब्धि पर ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत की सोच और हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सूर्यघर योजना इसका सशक्त उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश को देश में घरेलू सौर ऊर्जा उत्पादन का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।ऊर्जा विभाग के अनुसार योजना के सुचारू संचालन के लिए प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक नियमित समीक्षा, ऑनलाइन आवेदन की सरल व्यवस्था, समयबद्ध कनेक्शन तथा अनुदान के त्वरित भुगतान पर विशेष बल दिया गया। सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली और पारदर्शी व्यवस्था के कारण कम समय में इतनी बड़ी सौर क्षमता हासिल करना सम्भव हुआ है। हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है और आगामी चरण में दो गीगावाट रूफटॉप सौर क्षमता प्राप्त करने की तैयारी की जा रही है।
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