# राष्ट्रीय मान्यता और कल्याणकारी उपायों की मांग की
नई दिल्ली, 29 नवंबर (आरएनएस)। “हैलो बंजारा – चलो दिल्ली / दिल्ली आओ बंजारा – बजाओ नंगड़ा” अभियान का राष्ट्रीय पोस्टर विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व बंजारा भारत और हाल ही में स्थापित अखिल भारतीय बंजारा महा सेवा संघ ने किया। इस अवसर पर पूरे भारत से बंजारा समुदाय के प्रतिनिधि एकत्रित हुए, ताकि लंबे समय से चली आ रही सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को उजागर किया जा सके और भारत सरकार के सामने एक साझा मांग पत्र प्रस्तुत किया जा सके। पूर्व सांसद व ‘बंजारा भारत’ संगठन के संरक्षक और अध्यक्ष रविंद्र नायक ने कहा, स्वतंत्रता के आठ दशक बाद भी लगभग बीस राज्यों में बंजारा टांडों, नगलों और डेरे में आज भी पेयजल, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताएँ उपलब्ध नहीं हैं। यह समुदाय, जो सांस्कृतिक और भाषाई दृष्टि से एकजुट है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में SC, ST, OBC और VJNT श्रेणियों में वर्गीकृत है, अपनी बड़ी जनसंख्या होने के बावजूद सामाजिक और राजनीतिक रूप से हाशिए पर है। यह समुदाय लगभग 200 संसदीय और 1,000 विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है।
कार्यक्रम में लक्की शाह बंजारा के ऐतिहासिक योगदान को भी याद किया गया, जिनका टांडा कभी 350 एकड़ क्षेत्र में था, जो अब रायसीना हिल्स के नाम से जाना जाता है, जहाँ आज राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और अन्य राष्ट्रीय संस्थान स्थित हैं। आयोजकों ने इस क्षेत्र के शेष भूमि मुआवजे के निपटान की लंबित मांग को दोहराया, क्योंकि अब तक केवल एक हिस्सा ही आवंटित किया गया था। सामुदायिक नेताओं ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि बंजारा से जुड़े धरोहर स्थलों और भूमि की सुरक्षा और संरक्षण किया जाए। इनमें शामिल हैं: लोहारगढ़ (हरियाणा), मांगरह (राजस्थान), लखी सराय (बिहार), मथुरा–वृंदावन (उत्तर प्रदेश), सागर लक्की शाह झील (मध्य प्रदेश), बंजारा हिल्स, गोलकुंडा गेट (तेलंगाना), बाबा हाथीराम मठ (तिरुपति) और कदंबुर हिल्स (तमिलनाडु)। साझा मांग पत्र में बंजारा/गोर बोली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की भी मांग की गई है, जो तेलंगाना विधानसभा द्वारा पास किए गए प्रस्ताव पर आधारित है। इसके अलावा, सभी सोलह बंजारा उप-समूहों की एकरूप राष्ट्रीय मान्यता की भी मांग की गई है, ताकि राज्यों में संवैधानिक स्थिति में असमानता समाप्त हो और “वन नेशन, वन बंजारा” की नीति लागू हो सके।
आयोजकों ने राष्ट्रीय बंजारा टांडा–नगला–डेरे विकास बोर्ड की स्थापना की मांग की, ताकि पूरे देश में बंजारा बस्तियों को आवश्यक सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकें। इसके साथ ही दिल्ली और हैदराबाद में राष्ट्रीय बंजारा संग्रहालय और राष्ट्रीय बंजारा विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी की गई, ताकि सांस्कृतिक शोध और शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने देश भर में छोटे व्यापार और होकिंग करने वाले यायावर बंजारा युवाओं के लिए आधिकारिक पहचान पत्र और संरचित सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह भी किया।बंजारा महिलाओं में शिक्षा के निम्न स्तर को ध्यान में रखते हुए, समुदाय ने 200 जिला मुख्यालयों में बंजारा महिला आवासीय विद्यालय स्थापित करने की मांग की। अन्य मांगों में शामिल हैं: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रमुख सड़कों का नाम बंजारा प्रतीकों पर रखना, राष्ट्रीय बंजारा अनुसंधान और विकास आयोग का गठन, संसद परिसर में लक्की शाह बंजारा और मकन शाह लुबाना की मूर्तियों की स्थापना, राष्ट्रीय ट्रेन “बंजारा भारत रेल” का नामकरण, और बंजारा रेजिमेंट की स्थापना, ताकि समुदाय की वीर परंपरा को सम्मानित किया जा सके।कार्यक्रम का समापन एकता और सामूहिक आंदोलन के संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने केंद्र सरकार से अपील की कि वे इन लंबित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकास संबंधी मुद्दों का तुरंत समाधान करें।
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