जयदीप यादव
कोलकाता 7 दिसंबर (आरएनएस)। महानगर कोलकाता में 5 लाख श्रद्धालुओं के द्वारा सामूहिक गीता पाठ के आयोजन से जहां एक रिकॉर्ड बना। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आज पैर रखने की जगह नहीं था। इस भव्य धार्मिक आयोजन में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ गीता पाठ किया। कभी पूरी दुनियां में वामपंथियों के गढ़ के तौर पर ख्यात रहे कोलकाता में सनातनी जन जागरण का अपूर्व नजारा दिखा। 10 साल के बालक से लेकर 80 लास तक को लोगों ने जब सामूहिक गीता पाठ शुरु किया तो आस्था सिर चढ़ कर बोली।
यह कार्यक्रम बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रतिभागियों के हाथों में गीता थी और उन्होंने 11:30 बजे के शुभ मुहूर्त पर गीता के श्लोकों का पाठ शुरू किया। इस आयोजन में शामिल लोगों ने इसे हिंदुत्व की भावना, आस्था और भक्ति का प्रतीक बताया। कई प्रतिभागियों ने व्यक्त किया कि यह सभा पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर कथित अत्याचार के खिलाफ एकजुटता दिखाने और राज्य सरकार को एक संदेश देने के लिए थी। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस गीता पाठ से कलयुग के पापों का निवारण होगा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। कार्यक्रम का आयोजन सनातन संस्कृति संसद की ओर से किया गया था, जिसके अध्यक्ष कार्तिक महाराज, स्वामी निर्गुणानंद और अन्य साधु-संतों ने कार्यक्रम में मुख्य भूमिका निभाई है।कार्यक्रम में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा), साध्वी ऋतंभरा और स्वामी ज्ञानानंद मौजूद थे। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉक्टर सीवी आनंद बोस भी उपस्थित हुए।राज्यपाल ने कहा कि राज्य धार्मिक अहंकार खत्म करने को तैयार है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित गीता पाठ कार्यक्रम में उन्होंने मुर्शिदाबाद में शनिवार को हुई एक घटना का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की। इस घटना का संदर्भ न देते हुए उन्होंने केवल इतना कहा कि उन्होंने मुर्शिदाबाद में कुछ होते हुए देखा है।
गीता पाठ के मंच से राज्यपाल बोस ने भ्रष्टाचार खत्म करने की भी बात कही। उन्होंने भगवद्गीता के श्लोक परित्राणाय साधूनाम विनाशाय च दुष्कृताम धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म की स्थापना और अधर्म के अंत का संकल्प हमेशा बना रहता है। गीता पाठ के उक्त कार्यक्रम में विभिन्न मठों और धार्मिक संस्थाओं के साधु-संत शामिल थे। इसे राज्य में अब तक के सबसे बड़े सामूहिक गीता पाठ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंगाल की आध्यात्मिक परंपरा को उजागर करना और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना है। स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज, जिन्हें कार्तिक महाराज के नाम से भी जाना जाता है, ने कहा कि विभाजन के माहौल में आध्यात्मिक अभ्यास समाज को शांति और दिशा दे सकता है। उनके अनुसार राज्यभर से बड़ी संख्या में भक्त पहले ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की पुष्टि कर चुके हैं। कार्यक्रम के लिए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यापक तैयारी की गई है। विशाल मैदान में तीन बड़े मंच बनाए गए हैं और केंद्रीय कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है।कार्यक्रम की तैयारियों में कई बीजेपी नेताओं ने भी हिस्सा लिया। पूर्व राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसे सनातन संस्कृति के प्रति लोगों के बढ़ते जुड़ाव का संकेत बताया। वहीं, सांसद सुकांत मजूमदार ने शनिवार को स्वयं श्रद्धालुओं को भोजन परोसा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन में सेवा का एक छोटा-सा योगदान भी सौभाग्य की बात है।पद्मश्री कार्तिक महाराज ने कहा गीता सिर्फ हिंदुओं का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। यह समाज को जोड़ती है, लोगों में धैर्य और संतुलन लाती है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि ऐसे सामूहिक पाठ से एक अलग ऊर्जा मिलती है। विशेषकर युवाओं की उपस्थिति ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा।
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