कोलकाता 7 दिसंबर (आरएनएस)। तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रख कर मीडिया की सु्र्खियों में छा गए हैं। वहीं अब विधायक हुमायूं कबीर ने आज बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे आने वाले चुनावों से पहले असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ संभावित गठबंधन पर बातचीत कर रहे हैं। कबीर के अनुसार, इस गठबंधन का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में बीजेपी और तृणमूल दोनों को रोकना है। यह बयान तब आया जब कुछ घंटे पहले ही कबीर ने बेलडांगा में बाबरी मस्जिद जैसी दिखने वाली एक मस्जिद का नींव पत्थर रखा। यह कार्यक्रम भारी सुरक्षा के बीच हुआ और 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई, जिसके बाद नींव पत्थर रखने का समारोह हुआ। कबीर ने दावा किया कि इस मौके पर सऊदी अरब के दो मौलवियों सहित हज़ारों लोग मौजूद थे। वहां नारा-ए-तकबीर और अल्लाहु अकबर के नारे लगातार सुनाई दे रहे थे। इसी दौरान स्थानीय लोग पूरे दिन समूह बनाकर प्रस्तावित मस्जिद के लिए ईंटें लाते रहे।
इस विवादित परियोजना के कारण कबीर को इस हफ्ते की शुरुआत में ञ्जरूष्ट से निलंबित कर दिया गया था। उनका आरोप है कि कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और जिला प्रशासन उनकी पूरी मदद कर रहा है। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने निर्माण कार्य में दखल देने से तो इनकार कर दिया, लेकिन ममता बनर्जी सरकार को निर्देश दिया कि वे कानून-व्यवस्था बिगडऩे से रोकने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएं। सत्ताधारी ञ्जरूष्ट ने इस प्रोजेक्ट से और हुमायूं कबीर से पूरी तरह दूरी बना ली है। पार्टी ने इसके बजाय पूरे राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने के लिए सहनति दिवस (एकता दिवस) मनाने का फैसला किया है।


















