भारत ने भी किया 38 बांग्लादेशी मछुआरों को रिहा
कोलकाता 9 दिसंबर (आरएनएस)। भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने मंगलवार को बांग्लादेश से 47 भारतीय मछुआरों की सफल स्वदेश वापसी कराई। इसके साथ ही तीन भारतीय मछली पकडऩे वाली नौकाएं भी, जिन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों ने जब्त किया था, भारत वापस लाई गईं।जबकि भारत ने 38 बांग्लादेशी मछुआरों को रिहा किया। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रत्यावर्तन विदेश मंत्रालय की मंजूरी से किया गया और पूरा अभियान भारतीय तटरक्षक बल द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार के समन्वय में संपन्न हुआ। अधिकारी के अनुसार, यह प्रक्रिया एक पारस्परिक व्यवस्था का हिस्सा थी, जिसके तहत भारत ने भी 32 बांग्लादेशी मछुआरों और एक मछली पकडऩे वाली नाव को रिहा किया। ये मछुआरे भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अवैध रूप से मछली पकडऩे के दौरान पकड़े गए थे। उन्हें तटरक्षक पोत ‘विजयाÓ के माध्यम से बांग्लादेश तटरक्षक के जहाज ‘बीसीजीएस कामरुज्जमानÓ और ‘साधिन बंगलाÓ को सौंपा गया। यह आदान-प्रदान बंगाल की खाड़ी में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के निकट हुआ। अधिकारी ने बताया कि भारतीय मछुआरे और उनकी नौकाएं तटरक्षक पोत ‘विजयाÓ से पश्चिम बंगाल के फजेरगंज लाए गए हैं और उन्हें 10 दिसंबर को राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पारस्परिक पहल विदेश मंत्रालय द्वारा मानवीय और आजीविका संबंधी कारणों को ध्यान में रखकर की गई है। पिछले तीन महीनों में भारतीय तटरक्षक बल ने भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ रही छह बांग्लादेशी नौकाएं पकड़ी हैं। अधिकारी ने आगे बताया कि तटरक्षक बल के जहाज आईएमबीएल पर निरंतर चौकसी बनाए रखते हैं ताकि भारतीय मछुआरे बांग्लादेशी जलक्षेत्र में प्रवेश न करें। पिछले एक वर्ष में आईसीजी इकाइयों ने 300 से अधिक भारतीय नौकाओं को सीमा पार करने से रोककर भारतीय जलक्षेत्र में वापस भेजा है। इसके अलावा, तटरक्षक बल स्थानीय मत्स्य विभाग और मरीन पुलिस के सहयोग से तटीय गांवों में ‘कम्युनिटी इंटरेक्शन प्रोग्रामÓ (सीआईपी) चला रहा है, ताकि मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार न करने के लिए जागरूक किया जा सके। अधिकारी ने चेतावनी दी कि आईएमबीएल पार कर विदेशी जलक्षेत्र में मछली पकडऩा गंभीर अपराध है, जिससे विदेशी एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारी और मानसिक-शारीरिक उत्पीडऩ जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने बताया कि तटरक्षक बल ने राज्य प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह स्थानीय मत्स्य समुदाय को इस संबंध में कानूनी और सुरक्षा पहलुओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे।
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