ऋषिकेश,08 जनवरी (आरएनएस)। एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के चिकित्सकों ने अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) तकनीक का उपयोग करते हुए 65 वर्षीय वृद्ध मरीज के हृदय के माइट्रल वाल्व में मौजूद गंभीर लीकेज का बिना सर्जरी के उपचार किया है। वाल्व में अत्यधिक लीकेज के कारण मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी, जबकि सामान्यत: यह 60 प्रतिशत के आसपास होती है। मरीज जगतवीर सिंह, निवासी ग्राम मोहनपुर जट, तहसील रुड़की वर्ष 2023 में हृदय में स्टेंट प्रत्यारोपण करा चुके थे। बीते कुछ महीनों से उन्हें सांस फूलने, अत्यधिक थकान और दैनिक गतिविधियों में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। जांच में गंभीर माइट्रल रिगर्जिटेशन की पुष्टि हुई। उम्र अधिक होने और पूर्व हृदय रोग इतिहास के कारण ओपन हार्ट सर्जरी को अत्यधिक जोखिमपूर्ण माना गया। एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजिस्ट एडिशनल प्रो. डॉ. बरुण कुमार के नेतृत्व में 30 दिसंबर को इंटरवेंशनल प्रक्रिया के तहत टीईईआर तकनीक अपनाई गई। इस दौरान माइट्राक्लिप डिवाइस की सहायता से जांघ की रक्त नली के माध्यम से हृदय तक पहुंचकर माइट्रल वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को आपस में जोड़ा गया, जिससे रक्त के उल्टे प्रवाह में उल्लेखनीय कमी आई। इस न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और 6 जनवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इलाज करने वाली टीम में डॉ. सुवेन कुमार, सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी, एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सहित अन्य चिकित्सक शामिल रहे।
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