देहरादून,11 जनवरी (आरएनएस)। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वर्ष 2025 के दौरान राज्य में घटित विभिन्न आपदाओं से हुए नुकसान के आकलन हेतु तैयार पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंट (क्कष्ठहृ्र) रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (हृष्ठरू्र), भारत सरकार को प्रेषित कर दी है। इस रिपोर्ट में आपदाओं के कारण सामाजिक, अवसंरचना, उत्पादक एवं क्रॉस-कटिंग क्षेत्रों में हुए नुकसान, क्षति, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण आवश्यकताओं का विस्तृत एवं क्षेत्रवार आकलन प्रस्तुत किया गया है। देश में उत्तराखंड अकेला ऐसा राज्य है, जहां पहली बार पूरे प्रदेश का क्कष्ठहृ्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल ?15,103.52 करोड़ का समग्र आर्थिक प्रभाव (ञ्जशह्लड्डद्य श्वष्शठ्ठशद्वद्बष् ढ्ढद्वश्चड्डष्ह्ल) आंका गया है। इसमें ?3,792.38 करोड़ की प्रत्यक्ष क्षति (ष्ठड्डद्वड्डद्दद्गह्य), ?312.19 करोड़ की हानि (रुशह्यह्यद्गह्य) तथा ?10,998.95 करोड़ की पुनर्वास, पुनर्निर्माण एवं बेहतर निर्माण की आवश्यकता सम्मिलित है।
क्षेत्रवार प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं—
सामाजिक क्षेत्र : सामाजिक क्षेत्र में कुल ?4,966.85 करोड़ का आर्थिक प्रभाव दर्ज किया गया है। इसमें आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित रहे। स्वास्थ्य क्षेत्र में अकेले ?2,579.47 करोड़ का आर्थिक प्रभाव सामने आया है, जबकि आवास क्षेत्र में यह आंकड़ा ?2,005.48 करोड़ रहा।
अवसंरचना क्षेत्र: अवसंरचना क्षेत्र में कुल ?6,225.69 करोड़ का आर्थिक प्रभाव आंका गया है। जलापूर्ति क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां ?4,048.88 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त सड़कों को ?1,963.29 करोड़ तथा विद्युत क्षेत्र को ?213.52 करोड़ का प्रभाव पड़ा।
उत्पादक क्षेत्र: कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, पर्यटन एवं वानिकी सहित उत्पादक क्षेत्रों में कुल ?893.94 करोड़ का आर्थिक प्रभाव आंका गया है। इसमें पर्यटन क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा, जहां ?744.94 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया।
क्रॉस-कटिंग सेक्टर: आपदा जोखिम न्यूनीकरण (ष्ठक्रक्र) के अंतर्गत ?3,017.04 करोड़ की पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिससे भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा तैयार क्कष्ठहृ्र रिपोर्ट राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता, पर्वतीय परिस्थितियों एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य केवल नुकसान का आकलन करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में अधिक सुदृढ़, सुरक्षित एवं आपदा-रोधी उत्तराखण्ड के निर्माण हेतु योजनाबद्ध पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण का रोडमैप प्रस्तुत करना है।
इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त होगा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र पुनर्बहाली, आजीविका संरक्षण तथा बुनियादी ढांचे को ‘बिल्ड बैक बेटरÓ सिद्धांत के अनुरूप सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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