नई दिल्ली ,25 जनवरी (आरएनएस)। आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों को बधाई देती हूं। मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करने वाले, यहां उपस्थित युवा मतदाताओं सहित, पूरे देश के युवा मतदाताओं को मैं विशेष बधाई देती हूं। यह पहचान पत्र आपको विश्व के सबसे बड़े और जीवंत लोकतन्त्र में सक्रिय भागीदारी का अमूल्य अधिकार प्रदान करता है। मुझे विश्वास है कि देश के सभी युवा मतदाता बहुत जिम्मेदारी के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे तथा राष्ट्र के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएंगे।
आज मैं महिला मतदाताओं को भी विशेष बधाई देती हूं। विभिन्न चुनावों में भारी संख्या में मतदान करके हमारी माताएं-बहनें-बेटियां हमारे गणतन्त्र को और अधिक शक्तिशाली बना रही हैं।
निर्वाचन प्रक्रिया में सराहनीय योगदान देने के लिए आज पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थानों को मैं बधाई देती हूं।
लोकतन्त्र और मताधिकार के प्रसंग में बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के एक शिक्षाप्रद विचार का मैं उल्लेख किया करती हूं। बाबासाहब मानते थे कि मताधिकार का प्रयोग राजनैतिक शिक्षा को सुनिश्चित करने का माध्यम है। मैं आशा करती हूं कि अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए हमारे मतदाता, अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय देते रहेंगे और निर्वाचन पद्धति के माध्यम से हमारे लोकतन्त्र को और अधिक शक्ति प्रदान करते रहेंगे।
देवियो और सज्जनो,
भारतभूमि लोकतन्त्र की जननी है। हमारे आधुनिक लोकतन्त्र के संदर्भ में दो तिथियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। 26 नवंबर 1949 को हमने अपने संविधान को अपनाया। उसके दो महीने बाद 26 जनवरी, 1950 को हमने अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया और हमारा गणराज्य अस्तित्व में आया। संविधान के केवल 16 अनुच्छेद ऐसे थे जो 26 नवंबर, 1949 के दिन ही तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए थे। उनमें से एक अनुच्छेद 324 भी था जिसके तहत निर्वाचन आयोग की स्थापना और कार्यों से जुड़े प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। इसी अनुच्छेद के अनुसार 26 जनवरी, 1950 के दिन, यानी हमारे गणतन्त्र की स्थापना के एक दिन पहले ही, 25 जनवरी, 1950 को निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई। आज के दिन हम निर्वाचन आयोग की स्थापना के इस ऐतिहासिक अवसर पर अपने लोकतन्त्र का विशेष उत्सव मनाते हैं।
मुझे बताया गया है कि आज के उत्सव में राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के साथ-साथ राज्यों और संघ-राज्य-क्षेत्रों के स्तर पर, जिला और ड्ढशशह्लद्ध द्यद्ग1द्गद्य पर अनेक देशवासी और संस्थान भागीदारी कर रहे हैं। मैं निर्वाचन आयोग सहित, ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवसÓ के इस उत्सव से जुड़े सभी आयोजकों और प्रतिभागियों की सराहना करती हूं।
मुझे बताया गया है कि हमारे देश में मतदाताओं की संख्या 95 करोड़ से अधिक है। हमारे लोकतन्त्र की शक्ति केवल संख्या की विशालता में नहीं है बल्कि लोकतान्त्रिक भावना की गहराई में भी है। अत्यंत वयोवृद्ध मतदाता, दिव्यांग मतदाता और दूर-सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। मताधिकार के प्रयोग के ऐसे अनेक उत्साहवर्धक उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए मैं प्रबुद्ध मतदाताओं की तथा निर्वाचन आयोग के नेतृत्व में सक्रिय द्गद्यद्गष्ह्लद्बशठ्ठ द्वड्डष्द्धद्बठ्ठद्गह्म्4 के सभी लोगों की सराहना करती हूं। साथ ही, सेनाओं में तैनात ह्यद्गह्म्1द्बष्द्ग 1शह्लद्गह्म्ह्य, ष्टद्गठ्ठह्लह्म्ड्डद्य ्रह्म्द्वद्गस्र क्कशद्यद्बष्द्ग स्नशह्म्ष्द्गह्य के कर्मियों, राज्यों के पुलिसकर्मियों, द्गद्यद्गष्ह्लद्बशठ्ठ द्वड्डष्द्धद्बठ्ठद्गह्म्4 से जुड़े सभी कर्मचारियों तथा आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले सेवाकर्मियों को भी मताधिकार का प्रयोग करने की सुविधा प्रदान की जाती है। विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा मतदाताओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और समुचित सुविधाओं द्वारा मतदान को सम्पन्न कराने के सभी प्रयास प्रशंसा के योग्य हैं।
जन-भागीदारी लोकतन्त्र की भावना को जमीनी स्तर पर कार्यरूप देती है। निर्वाचन आयोग ने ‘कोई भी मतदाता छूटने न पाएÓ इस उद्देश्य के साथ अनेक प्रयास किए हैं। मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के अनेक कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई इस वर्ष की थीम “रू4 ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड, रू4 ङ्कशह्लद्ग : ढ्ढठ्ठस्रद्बड्डठ्ठ ष्टद्बह्लद्ब5द्गठ्ठ ड्डह्ल ह्लद्धद्ग द्धद्गड्डह्म्ह्ल शद्घ ढ्ढठ्ठस्रद्बड्डठ्ठ ष्ठद्गद्वशष्ह्म्ड्डष्4” हमारे लोकतन्त्र की भावना को व्यक्त करती है। साथ ही, हमारे लोकतन्त्र में मताधिकार के महत्व को भी रेखांकित करती है।
मतदान केवल राजनैतिक अभिव्यक्ति नहीं है। यह निर्वाचन की लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की आस्था का प्रतिबिंब है। यह प्रत्येक नागरिक द्वारा अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त करने का माध्यम भी है। बिना किसी भेदभाव के, सभी वयस्क नागरिकों को उपलब्ध मतदान का अधिकार, राजनैतिक और सामाजिक न्याय तथा समता के हमारे संवैधानिक आदर्शों को ठोस अभिव्यक्ति देता है। हमारे संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई ह्रठ्ठद्ग क्कद्गह्म्ह्यशठ्ठ, ह्रठ्ठद्ग ङ्कशह्लद्ग की व्यवस्था हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा जन-सामान्य के विवेक पर दृढ़ आस्था का परिणाम थी। हमारे देश के मतदाताओं ने उनकी आस्था को सही सिद्ध किया और भारतीय लोकतन्त्र एक असाधारण उदाहरण के रूप में विश्व पटल पर सम्मानित हुआ।
यह प्रसन्नता की बात है कि इस वर्ष ढ्ढठ्ठह्लद्गह्म्ठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठड्डद्य ढ्ढठ्ठह्यह्लद्बह्लह्वह्लद्ग द्घशह्म् ष्ठद्गद्वशष्ह्म्ड्डष्4 ड्डठ्ठस्र श्वद्यद्गष्ह्लशह्म्ड्डद्य ्रह्यह्यद्बह्यह्लड्डठ्ठष्द्ग की अध्यक्षता का अवसर भारत के निर्वाचन आयोग को दिया गया है। मुझे बताया गया है कि हाल ही में निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित एक अंतर-राष्ट्रीय सम्मेलन में 42 देशों के श्वद्यद्गष्ह्लद्बशठ्ठ रूड्डठ्ठड्डद्दद्गद्वद्गठ्ठह्ल क्चशस्रद्बद्गह्य ने भागीदारी की तथा अन्य अनेक देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस प्रकार, विश्व-पटल पर हमारे लोकतन्त्र की प्रतिष्ठा के अनुरूप भारत का निर्वाचन आयोग विश्व के अन्य ऐसे निर्वाचन संस्थानों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है।
आज के मतदाता, भारत के भविष्य-निर्माता भी हैं। मतदान का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि सभी वयस्क नागरिक अपने संवैधानिक कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग करें। मैं आशा करती हूं कि हमारे सभी मतदाता प्रलोभन, अनभिज्ञता, भ्रामक सूचना, दुष्प्रचार और पूर्वाग्रह से मुक्त रहते हुए, अपने विवेक के बल पर हमारी निर्वाचन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखेंगे।
मुझे यह भी विश्वास है कि निर्वाचन आयोग के प्रयासों तथा योगदान से भारत के लोकतन्त्र की प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि होती रहेगी। इसी विश्वास के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देती हूं।
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