ऋषिकेश,02 फरवरी (आरएनएस)। निर्माणाधीन ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना की समीक्षा के लिए सोमवार को रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के सीएमडी सलीम अहमद ऋषिकेश पहुंचे। उन्होंने नौ पैकेजों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी निगम के इंजीनियरों और निजी एजेंसियों के अधिकारियों से सिलसिलेवार ली और तय समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। हरिद्वार बाईपास मार्ग स्थित आरवीएनएल कार्यालय में उन्होंने मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बड़ोनी की मौजूदगी में समीक्षा बैठक की। बैठक में रेल लाइन के लिए सुरंगों के निर्माण और ट्रैक से संबंधित कार्यों का फीडबैक लिया गया। सीएमडी ने परियोजना को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि निर्माण कार्य दिसंबर 2028 से पहले पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि पहाड़ों में सुरक्षित आवागमन और सामरिक दृष्टि से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुरंगों से संबंधित अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ सुरंगों का निर्माण अभी शेष है। अधिकारियों को विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद परियोजना का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को ढालवाला से देवप्रयाग तक निर्माण कार्यों की जमीनी स्थिति का निरीक्षण भी किया जाएगा। मौके पर निगम के जीएम हेमेंद्र कुमार, पामीर अरोड़ा, सुमित जैन, एजीएम ओपी मालगुड़ी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। स्टेशनों के निर्माण में आई तेजी वर्ष 2020 से उत्तराखंड में शुरू हुई करीब 126 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। आरवीएनएल ने धारी देवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर स्टेशनों के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया को भी पूरा कर लिया है। जनवरी में ही यह प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही 126 करोड़ रुपये की लागत दो साल के भीतर इन आधुनिक स्टेशनों का निर्माण पूरा करना होगा। मालूम हो कि, परियोजना में कुल 13 स्टेशन हैं। इन 13 स्टेशनों में वीरभद्र स्टेशन भी शामिल है। इसी स्टेशन से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना के ट्रैक को जोड़ा गया है। 19 में से 8 रेल ब्रिज का काम पूरा रेल परियोजना में 19 रेल ब्रिज हैं। इनमें से चंद्रभागा, शिवपुरी, गूलर, ब्यासी, कोडिय़ाला, पौड़ी नाला, लक्ष्मोली और श्रीनगर पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। 11 पुलों का निर्माण भी लगभग 65 फीसदी पूरा हो चुका है। वर्ष 2026 के अंत तक सभी पुलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, शिवपुरी और ब्यासी रेलवे स्टेशनों का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। उधर, परियोजना में सुरंगों की खुदाई कार्य लगभग 95 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिनमें अब ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
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