देहरादून,03 फरवरी (आरएनएस)। शहर में शब-ए-बरात (मुकद्दस रात) का पर्व पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। रहमतों वाली इस रात में अकीदतमंदों ने जागकर पूरी रात इबादत में गुजारी और अपने गुनाहों की माफी मांगी। जहां एक ओर मस्जिदों में जलसों और तकरीरों का दौर चला, वहीं घरों में भी महिलाओं और बच्चों ने कुरान-ए-पाक की तिलावत और नमाज अदा कर अल्लाह को राजी किया। — मस्जिदों में बयान और दुआओं का दौर शहर की प्रमुख मस्जिदों में उलेमाओं ने शब-ए-बरात की फजीलत (महत्व) पर रोशनी डाली। जामा मस्जिद (पलटन बाजार) शहर काजी मुफ्ती हशम सिद्दीकी ने अकीदतमंदों को खिताब करते हुए कहा कि यह रात अपने रब को मनाने और गुनाहों से तौबा करने की है।
पार्क वाली मस्जिद (मुस्लिम कॉलोनी): मुफ्ती सलीम कासमी ने कहा कि यह रात हमें आने वाले रमजान के पाक महीने के लिए तैयार करती है।सना मस्जिद में मुफ्ती वासिल और सईदिया मस्जिद में मुफ्ती अयाज ने दीन की बातें बताईं और लोगों से नेक रास्ते पर चलने की अपील की। — समाज को सुधारने का संकल्प धार्मिक इबादत के साथ-साथ उलेमाओं ने सामाजिक बुराइयों पर भी गहरा प्रहार किया। जलसों को संबोधित करते हुए मुफ्ती रईस कासमी और मौलाना अब्दुल मन्नान ने युवाओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को नशे जैसी लानत से दूर रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने शादियों में दिखावे और फिजूलखर्ची को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए सादगी अपनाने और सफाई (पाकीजगी) का खास ख्याल रखने की ताकीद की। पूरी रात शहर का माहौल रूहानी बना रहा। अकीदतमंदों ने देश में अमन-चैन और खुशहाली के लिए भी विशेष दुआएं मांगीं।
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