भिंड 07 Feb, (Rns)- भिंड जिले से एक शादी सामने आई जिसने समाज को नई सोच देने का काम किया है। खिड़किया मोहल्ला निवासी अनोज पाठक ने अपने बेटे के विवाह में दहेज लेने से साफ इनकार कर यह संदेश दिया कि रिश्तों की मजबूती धन से नहीं, संस्कारों से तय होती है।
अनोज पाठक के पुत्र आकर्ष पाठक का विवाह 5 फरवरी को शहर के जगदीश मैरिज गार्डन में संपन्न हुआ। विवाह समारोह के दौरान फलदान की रस्म में वधु अनिक्षा के पिता विनोद उपाध्याय, जो जबलपुर से आए थे, ने परंपरा के अनुसार 51 लाख रुपये शगुन स्वरूप भेंट किए। लेकिन दूल्हे के पिता ने केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार कर शेष पूरी राशि ससम्मान लौटा दी।
विवाह सौदा नहीं, संस्कारों का बंधन
इस मौके पर अनोज पाठक ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे का विवाह किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संस्कार, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों के आधार पर किया है। उन्होंने कहा कि बेटी कोई बोझ नहीं, बल्कि घर की लक्ष्मी होती है और विवाह में धन से अधिक भावनाओं और विश्वास की भूमिका होती है।
समारोह में मिली भरपूर सराहना
इस फैसले की समारोह में मौजूद लोगों ने खुले दिल से प्रशंसा की। कई लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ समाज में बदलाव की मजबूत शुरुआत बताया। यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं रहा, बल्कि एक सामाजिक संदेश बनकर उभरा।


















