नईदिल्ली,10 फरवरी (आरएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और एपस्टीन फाइल्स को लेकर सरकार को घेरा। राहुल ने कहा, अमेरिका की नजर भारत के लोगों के डेटा पर है। अगर अमेरिका को सुपरपावर बने रहना हैं तो इसकी चाबी भारतीय डेटा ही है। राहुल ने दावा किया कि अमेरिका से व्यापार समझौता दबाव में किया गया है और भारत अमेरिका की बात नहीं मानेगा तो फिर से टैरिफ बढ़ा देगा।
राहुल ने कहा, एआई से एक खतरनाक दुनिया दिख रही है। देश के 140 करोड़ लोगों के सामने नई चुनौती है। डॉलर हथियार की तरह इस्तेमाल हो रहा है। बजट में इन जरूरी चीजों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। बजट में डेटा से जुड़ा कुछ भी नहीं। डेटा महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हम मोलभाव करते तो पहली बार डेटा पर होती। हम कहते कि अगर आप डॉलर बचाना चाहते हैं, तो हमारे हित सबसे ऊपर हैं।
राहुल ने कहा, बांग्लादेश अगर टेक्सटाइल्स उत्पाद निर्यात करता है, तो उस पर जीरो टैरिफ है। हमारा टेक्सटाइल्स उद्योग गया। अमेरिकी निर्यात बढ़ा, हमें क्या मिला। ट्रंप ने टैरिफ बढ़ा दिया। अब क्या अमेरिका तय करेगा कि हम कहां से तेल खरीदें? ऐसा किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। अमेरिका अगर यह कह रहा है कि आप यहां से तेल नहीं खरीद सकते, इसका मतलब है कि ऊर्जा क्षेत्र का हथियारीकरण हो रहा है।
अगर हमारी सरकार होती और हम ट्रंप से बात करते को कहते कि बात बराबरी पर होगी, हम आपके नौकर नहीं है। सरकार ने अमेरिका के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है, ये 140 करोड़ भारतीयों का भी आत्मसमर्पण है। सरकार को भारत माता को बेचने में शर्म नहीं आई? मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री ने भारत को क्यों बेचा? क्योंकि ट्रंप उनका गला दबा रहे हैं। हम अस्थिरता की दुनिया में जी रहे हैं।
राहुल ने कहा, प्रधानमंत्री की आंखों में डर दिखता है। इसके 2 कारण हैं- एक एपस्टीन। सरकार की डिफेंस चोक है इसकी वजह हैं मिस्टर अडाणी। अडाणी एक साधारण कारोबारी नहीं हैं। उनकी कंपनी पर अमेरिका में मामला दर्ज है। इसका लक्ष्य प्रधानमंत्री हैं। अनिल अंबानी जेल क्यों नहीं गए? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं हरदीप पुरी से भी पूछना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि अनिल को एपस्टीन से किसने मिलवाया और हरदीप भी जानते हैं।
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