बीजिंग ,19 फरवरी । अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चीन को उसकी आर्थिक नीतियों को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। वैश्विक निकाय ने कहा है कि मौजूदा नीतियां न केवल चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि अन्य देशों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। ढ्ढरूस्न ने चीन से घरेलू उपभोक्ता खर्च पर आधारित विकास मॉडल अपनाने और अपनी रणनीति में बदलाव करने का आग्रह किया है।
आईएमएफ द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 18 फरवरी को चीनी अर्थव्यवस्था की वार्षिक समीक्षा के दौरान ढ्ढरूस्न के कार्यकारी निदेशकों ने यह बयान जारी किया। समीक्षा में चीन के बड़े चालू खाता अधिशेष पर चिंता जताई गई, जिसका उसके व्यापारिक साझेदार देशों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
आईएमएफ ने कहा कि चीन का अधिशेष बहुत बड़ा है। युआन (रेनमिन्बी) की कमजोर कीमत से चीनी निर्यात को लाभ मिल रहा है, लेकिन घरेलू मांग कमजोर हो रही है और आयात में कमी आ रही है। बढ़ता डिफ्लेशन भी चीन के लिए चिंता का विषय बताया गया है।
इससे पहले त्रशद्यस्रद्वड्डठ्ठ स्ड्डष्द्धह्य के अर्थशास्त्रियों ने भी चीन की आर्थिक नीतियों के वैश्विक असर को लेकर चेतावनी दी थी। पिछले साल नवंबर में जारी एक विश्लेषण में कहा गया था कि चीन की बढ़ती निर्यात क्षमता का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अब ढ्ढरूस्न ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ढ्ढरूस्न ने कहा कि चीन की मौजूदा नीतियों से देश के भीतर संसाधनों का अपव्यय हो रहा है और विदेशों में असंतुलन बढ़ रहा है। संस्था ने बीजिंग से घरेलू उपभोग पर आधारित विकास मॉडल अपनाने और निर्यात पर निर्भरता कम करने की सलाह दी है।
हालांकि, ढ्ढरूस्न बोर्ड में चीन के प्रतिनिधि झांग झेंगक्सिन ने इन आलोचनाओं को खारिज किया है। उनका कहना है कि 2025 में चीन की निर्यात वृद्धि मुख्य रूप से उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार क्षमता से प्रेरित रही है।
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