न्यूयॉर्क ,19 फरवरी । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारत के खिलाफ टैरिफ नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी सांसद क्चह्म्ड्डस्र स्द्धद्गह्म्द्वड्डठ्ठ ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का बहाना तलाश रहा है और उसे अलग से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। हाल ही में राष्ट्रपति ष्ठशठ्ठड्डद्यस्र ञ्जह्म्ह्वद्वश्च ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।
शर्मन ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर और अधिक टैरिफ लगाने का बहाना खोज रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन इसका कारण रूस से तेल आयात को बता रहा है। उनके अनुसार, हंगरी अपने लगभग 90 प्रतिशत तेल का आयात रूस से करता है और उस पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया है। वहीं रूस के बड़े खरीदार चीन पर भी रूसी तेल खरीदने के कारण कोई विशेष प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, हालांकि अन्य कारणों से उस पर असर पड़ा है। सांसद ने कहा कि भारत रूस से लगभग 21 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसके बावजूद उसे ही निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से इस नीति में तत्काल बदलाव की मांग की।
व्यापार आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात 21.77 प्रतिशत घटकर 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। इससे पहले सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में भी निर्यात में गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि नवंबर में इसमें 22.61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में अमेरिका से आयात 23.71 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया।
अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लागू किया था। बाद में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनी, जिसके तहत सात फरवरी से भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क हटा दिया गया और जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया।
टैरिफ नीति पर आई एक नई रिपोर्ट ने भी सवाल खड़े किए हैं। पहले दावा किया गया था कि आयात शुल्क का बोझ विदेशी कंपनियों और सरकारों पर पड़ेगा, लेकिन ताजा अध्ययन में पाया गया कि इन शुल्कों का लगभग 90 प्रतिशत भार अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने उठाया। यह निष्कर्ष स्नद्गस्रद्गह्म्ड्डद्य क्रद्गह्यद्गह्म्1द्ग क्चड्डठ्ठद्म शद्घ हृद्ग2 ङ्घशह्म्द्म से जुड़े अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण में सामने आया है। वहीं स््र ञ्जशस्रड्ड4 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छह फरवरी को जारी ञ्जड्ड& स्नशह्वठ्ठस्रड्डह्लद्बशठ्ठ के अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि 2025 में प्रत्येक अमेरिकी परिवार पर लगभग 1000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, जो 2026 में बढ़कर 1300 डॉलर तक पहुंच सकता है।
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