जौनपुर,21 फरवरी (आरएनएस)। फागुन का महीना आग या है । जिले भर के ग्रामीणों क्षेत्र में प्रकृति मानो अपने पूरे श्रृंगार में उतर आयी है। चारों तरफ पतझड़ की उदासी को पीछे छोड़ खेतों में सरसों के पीले फूलों की चादर बिछ गयी है और गेहूं की हरी-भरी बालियां हवा के झोंकों संग लहराने लगी हैं। ज्ञात हो कि यह दृश्य केवल आंखों को सुकून ही नहीं देता, बल्कि मनुष्य के जीवन में भी नई ऊर्जा और उमंग भर देता है।फागुन की यह बहार ग्रामीण अंचल में एक अलग ही उत्सव का माहौल बना देती है। खेतों में खिले सरसों के फूल वातावरण को खुशबू और रंगों से भर देते हैं। वहीं गेहूं की हरियाली किसानों के चेहरे पर उम्मीद और खुशी की चमक ला देती है। खेतों में काम करते किसान और मजदूर भी इस मौसम में अलग ही उत्साह के साथ नजर आते हैं। प्रकृति का यह परिवर्तन केवल खेती-बाड़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गांवों में त्योहारों की रौनक भी बढ़ जाती है। फागुन के साथ ही होली का पर्व नजदीक आता है, जिससे हर घर में खुशियों की तैयारी शुरू हो जाती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के मन में उमंग का संचार होता है। सरसों के पीले फूल और गेहूं की हरियाली यह संदेश देती है कि जीवन में हर पतझड़ के बाद नई बहार जरूर आती है। यही कारण है कि फागुन का यह मौसम लोगों के लिए सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि नई उम्मीद, उत्सव और आनंद का प्रतीक बन जाता है। फागुन की यह बहार गांव-देहात में खुशियों का रंग बिखेर रही है और हर दिल में नए उत्सव की दस्तक दे रही है।

