नई दिल्ली,23 फरवरी (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि 2018 से पहले के जमीन अधिग्रहण के मामलों को दोबारा नहीं खोला जा सकता. यह मामला उन किसानों को ब्याज के साथ मुआवजा देने से जुड़ा है जिनकी जमीन एनएचएआई एक्ट के तहत ली गई थी. 2019 में, कोर्ट ने फैसला दिया था कि एनएचएआई एक्ट के तहत जमीन खोने वाले किसानों को ब्याज के साथ मुआवजा देने का नियम पिछली तारीखों से भी लागू होगा.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की विशेष पीठ के सामने यह मामला आया. पीठ ने यह टिप्पणी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस याचिका पर सुनवाई शुरू करते हुए की, जिसमें 2019 के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है.
एनएचएआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि 2019 के फैसले से लगभग 32,000 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक बोझ पड़ गया है, इसलिए इसे केवल भविष्य के मामलों पर ही लागू किया जाना चाहिए. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया था और कहा था कि किसानों को इन लाभों से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.
मेहता ने कहा, शायद तब अदालत को लगा था कि यह मामला केवल 100 करोड़ रुपये का है. उन्होंने यह भी कहा कि एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बंद हो चुके मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा.
इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की, कट-ऑफ तारीख 2008 लगती है, बशर्ते उस समय दावे लंबित रहे हों. 2018 से पहले के खत्म हो चुके मामलों को दोबारा नहीं खोला जा सकता. जो मामले 2008 में लंबित थे, वे जारी रहेंगे. अगर 2020 की शुरुआत में किसी ने आवेदन देकर 2008 के आधार पर समानता मांगी है, तो हम उन्हें अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए हां कह सकते हैं, लेकिन भूमि अधिग्रहण के मामलों की तरह ब्याज देने के लिए नहीं.
संक्षिप्त दलीलों को सुनने के बाद, पीठ ने सभी पक्षों से यदि कोई लिखित प्रस्तुतिकरण हो तो उसे दाखिल करने को कहा और पुनर्विचार याचिका को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया.
पिछले साल 4 नवंबर को, सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले के खिलाफ एनएचएआई की पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई करने की सहमति दी थी. पिछले साल नवंबर में, सॉलिसिटर जनरल ने पीठ के समक्ष दलील दी थी कि इस मामले का लगभग 32,000 करोड़ रुपये का व्यापक प्रभाव होगा, न कि 100 करोड़ रुपये जैसा कि पहले याचिका में बताया गया था.
4 फरवरी, 2025 को, शीर्ष अदालत ने एनएचएआई की याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया था कि किसानों को मुआवजा और ब्याज देने का उसका 2019 का निर्णय, जिनकी भूमि एनएचएआई अधिनियम के तहत अधिग्रहित की गई थी, पिछली तारीख से लागू होगा.
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