नई दिल्ली ,23 फरवरी (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर से सभी कोयला आधारित उद्योगों को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रालयों से जवाब मांगा, ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार बने वायु गुणवत्ता संकट से निपटने के लिए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि वो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर 12 मार्च को वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण के मुद्दे की जांच करेगी.
पीठ ने निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से पैदा होने वाली धूल से निपटने के लिए सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए उपायों पर सभी हितधारकों से जवाब भी मांगा.
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय से इस सुझाव पर जवाब मांगा कि दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में कोई भी नया कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र स्थापित न किया जाए.
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को एनसीआर में कोयला आधारित उद्योगों सहित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का आदेश दिया.
इन नोटिसों को कोर्ट द्वारा तामील माना जाएगा और राज्यों को मिली प्रतिक्रिया का विवरण देते हुए एक कार्रवाई योजना प्रस्तुत करनी होगी. कोर्ट ने एमओईएफसीसी, एमओपीएनजी और विद्युत मंत्रालय को एनसीआर में कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के मकसद से एक संयुक्त प्रस्ताव पेश करने के लिए कहा. कोर्ट ने आदेश दिया, प्रस्ताव में सबसे पहले उद्योगों की पहचान की जाए और ये तय किया जाए कि उनके लिए वैकल्पिक ईंधन स्रोत क्या उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
कोर्ट ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार को सीएक्यूएम द्वारा अनुशंसित इन दीर्घकालिक समाधानों को लागू करने के लिए एक विशिष्ट कार्य योजना पेश करने का आदेश दिया.
कोर्ट ने कहा, आयोग ने कार्रवाई करने के लिए अपेक्षित संबंधित एजेंसियों की पहचान कर ली है. इसलिए हम दिल्ली सरकार को इन उपायों को प्रभावी बनाने के लिए एक प्रस्तावित कार्य योजना पेश करने का आदेश देते हैं. अब पीठ ने सभी हितधारकों को 12 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी-अपनी स्थिति रिपोर्ट और प्रस्ताव दाखिल करने का आदेश दिया है.
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