देहरादून,25 मार्च (आरएनएस)। दून विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज की ओर से बुधवार को ‘गज महोत्सवÓ का आयोजन किया गया। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की इस पहल में देश भर के विशेषज्ञों ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व पर विचार साझा किए। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल ज्ञान देने तक सीमित न रहकर समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करने चाहिए। विशिष्ट अतिथि और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वी. बी. माथुर ने नीतिगत हस्तक्षेप और लैंडस्केप स्तर पर संरक्षण योजना की आवश्यकता पर बल दिया। स्वागत भाषण में प्रो. कुसुम अरुणाचलम ने हाथी और गौर के बीच पारिस्थितिक संबंधों को वन पारितंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। राजाजी नेशनल पार्क के पूर्व निदेशक डॉ. रसिली ने सामुदायिक भागीदारी और हैबिटेट कनेक्टिविटी को सफलता का आधार बताया। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डॉ. बिलाल हबीब ने हाथियों के आवागमन की वैज्ञानिक समझ को संघर्ष कम करने के लिए अनिवार्य बताया। इस दौरान डॉ. अनिल कुमार सिंह और अभिषेक रावत ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में ‘एलीफेंट: लॉर्ड ऑफ द जंगलÓ और ‘हाथीबंधुÓ लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। डॉ. अंजली भारती ने सभी का आभार व्यक्त किया.
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