देहरादून,25 मार्च (आरएनएस)। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोडऩे की पहल के तहत बुधवार को ‘प्रज्ञानम्Ó एआई चैटबॉट लॉंच हो गया। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित इस चैटबॉट का लोकार्पण किया। राज्यपाल ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा,वेद, उपनिषद, पुराण और दर्शन आज भी प्रासंगिक है। ‘प्रज्ञानम्Ó जैसे प्लेटफॉर्म इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इसे युवाओं को अपनी जड़ों, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोडऩे का सशक्त माध्यम बताया।यह चैटबॉट विश्वविद्यालय की ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्चÓ पहल के तहत विकसित किया गया है, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित शोध, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और शैक्षणिक सामग्री का समावेश किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि इससे देश-विदेश के विद्यार्थी और शोधार्थी लाभान्वित होंगे।कुलपति प्रो. एनकेजोशी ने चैटबॉट की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कुलपति डॉ. परविंदर कौशल, प्रो. रमाकांत पांडेय, प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल,श्री स्वामी जगन्नाथ आश्रम ऋषिकेश के महंत लोकेश दास जी महाराज, गरीबदासी आश्रम हरिद्वार के स्वामी रविदेव शास्त्री जी महाराज, चेतन ज्योति आश्रम हरिद्वार के स्वामी शिवानंद जी महाराज, स्वामी नारायण आश्रम ऋषिकेश के स्वामी नारायण चरण दास महाराज, निर्मल संतपुरा आश्रम हरिद्वार के महंत जगजीत सिंह जी महाराज, कृष्ण कुंज आश्रम ऋषिकेश के स्वामी गोपालाचार्य जी महाराज, रामनिवास आश्रम हरिद्वार के स्वामी दिनेश दास जी महाराज, स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि जी महाराज आदि भी मौजूद रहे।’प्रज्ञानम्Ó यानिदेहरादून,25 मार्च (आरएनएस)। ‘प्रज्ञानम्Ó एआई चैटबॉट भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित एक डिजिटल मंच है, जो वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, भारतीय गणित, संगीत, नाट्यशास्त्र और दर्शन जैसे विषयों पर त्वरित व प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है। यह शोध-आधारित डेटाबेस पर निर्मित है, जिससे लोगों को प्रमाणिक जानकारी मिल सकेगी। विद्यार्थी, शोधार्थी और आम नागरिक द्धह्लह्लश्चह्य://श्चह्म्ड्डद्द4ड्डठ्ठड्डद्व.द्यद्ब1द्ग/? के माध्यम से इसका उपयोग कर सकते हैं। कुलपति एनके जोशी के अनुसार यह प्लेटफॉर्म जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत कर ज्ञान को सुलभ बनाता है और भारतीय परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में सहायक है।
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