० वर्षा होने के पूर्व बेचने से मार्कफेड को मिलेगा उचित मूल्य-अध्यक्ष
० धान बेचने में घोटाला करने का आरोप लगाया कांग्रेस ने
रायपुर, 28 मार्च (आरएनएस)। प्रदेश में धान खरीदी का कार्य समाप्त होने के पश्चात आठ हजार मीटरिक टन अतिशेष धान बेचने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए शीघ्र ही टेंडर निकाल दिया जाएगा। इस आशय की जानकारी मार्कफेड के चेयरमैन शशिकांत द्विवेदी ने दी है।
मार्कफेड के चेयरमेन शशिकांत द्विवेदी ने बताया कि राज्य में धान खरीदी के लिए मार्कफेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। मार्कफेड ने 25 लाख किसानों से १.४० मीटरिक टन धान की खरीदी की है। इसके एवज में किसानों को समर्थन मूल्य और बोनस राशि का भुगतान कर दिया गया है। कुल मिलाकर किसानों के खाते में 50 हजार करोड़ रुपये भेज दिये गये है। इसके पश्चात अब विभिन्न धान खरीदी केंद्रों में आठ हजार मीटरिक टन अतिरिक्त धान पड़ा हुआ है जिसका उठाव नहीं हुआ है। यह धान खुले में रखा हुआ है बरसात होने के पश्चात अंकुरित हो जाता है जिससे धान खराब हो जाता है। इससे यहां सरकार को घाटा होता है वहीं यह धान कोई काम नहीं आता। इसलिए बरसात लगने के पूर्व इसे बेच दिया जाएगा। राज्य के जिला विपणन अधिकारियों से इसकी जानकारी मंगाई गई है।
मार्कफेड के अध्यक्ष के अनुसार राज्य में धान का मूल्य समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा खरीदा जाता है लेकिन मार्कफेड से धान खरीदने पर बोली लगाने वाले तय करेंगे कि इसका रेट क्या होगा। इसके लिए अलग अलग स्टेक बनाकर धान की बिक्री की जाएगी।
कम मूल्य पर धान बेचने का आरोप-बैज
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि मार्कफेड द्वारा जो धान अतिशेष बेचा जा रहा है इसे व्यापारियों और मिलरों के सहयोग से कम कीमत पर खरीदा जाएगा। इससे सरकार को घाटा होगा। ज्ञात रहे सरकार इस खरीदे हुए धान का मूल्य पहले ही चुका चुकी है। मार्कफेड को निरंतर घाटा हो रहा है।
आर शर्मा
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