जयपुर 31 March, (Rns): राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। यहां एक मंदिर के सामने बार्सिलोना में रहने वाली रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने अपने एक खास फोटोशूट के लिए एक असली हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंग दिया। इस गुलाबी हाथी की पीठ पर बैठी एक मॉडल की तस्वीरें इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों के सामने आते ही पशु प्रेमी और आम इंटरनेट यूजर्स भड़क गए हैं और इसे जानवरों के साथ सरासर क्रूरता बता रहे हैं।
राजस्थानी संस्कृति से प्रेरित होकर आया यह अजीब आइडिया
रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा एक आर्ट एक्सपीडिशन (कला अभियान) के तहत जयपुर आई हुई थीं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस विवादित फोटोशूट की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया कि जयपुर शहर के रंग-बिरंगे माहौल और यहां की अनूठी संस्कृति से प्रेरित होकर उनके दिमाग में यह आइडिया आया था। उनकी कल्पना थी कि पारंपरिक राजस्थानी दरवाजों के सामने एक गुलाबी हाथी खड़ा हो। उनका मानना था कि हाथी राजस्थान का एक बेहद अहम प्रतीक है, इसलिए वह उसे अपने आर्ट प्रोजेक्ट में शामिल किए बिना नहीं रह सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि इस शूट के लिए हेरिटेज लोकेशन की परमिशन लेना और एक हाथी का इंतजाम करने के लिए कई फार्म्स के चक्कर काटना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
विवाद बढ़ने पर फोटोग्राफर ने दी ऑर्गेनिक रंग होने की सफाई
गुलाबी हाथी की तस्वीरें वायरल होने के बाद जब जानवरों की सुरक्षा और क्रूरता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे, तो जूलिया बुरुलेवा को अपनी तरफ से सफाई पेश करनी पड़ी। फोटोग्राफर का दावा है कि हाथी को रंगने के लिए जिस गुलाबी रंग का इस्तेमाल किया गया था, वह पूरी तरह से प्राकृतिक (ऑर्गेनिक) और स्थानीय था। उन्होंने तर्क दिया कि यह वही रंग है जो भारत में त्योहारों के दौरान आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इससे हाथी की त्वचा या सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और यह उसके लिए पूरी तरह सुरक्षित था।
‘इंस्टाग्राम लाइक्स के लिए दुर्व्यवहार’, लोगों का फूटा गुस्सा
फोटोग्राफर की इस सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। लोग इस कृत्य को कला के नाम पर बेजुबान जानवरों के साथ दुर्व्यवहार करार दे रहे हैं। एक यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत आकर महज इंस्टाग्राम पर लाइक्स बटोरने के लिए हाथियों को पेंट करना कोई कला नहीं, बल्कि क्रूरता है। अन्य लोगों का कहना है कि रचनात्मक आजादी का यह मतलब बिल्कुल नहीं होता कि आप गैर-जिम्मेदाराना हरकतें करें और किसी जानवर को महज अपनी तस्वीरों का ‘प्रॉप’ (सामान) बना लें। कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि जब आज के दौर में तस्वीरों को खूबसूरत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक मौजूद है, तो फिर अपने शौक के लिए किसी असली हाथी को तकलीफ देने की क्या जरूरत थी।

