कोलकाता 31 March, (Rns): कोलकाता हाई कोर्ट ने संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के अवैध रिश्ते या बिना तलाक लिए की गई दूसरी शादी से कोई संतान पैदा होती है, तो उसका भी अपने पिता की पेंशन पर पूरा हक है। पूर्वी रेलवे में काम करने वाले एक गेटमैन से जुड़े पारिवारिक मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह बड़ा आदेश दिया है। अदालत का यह फैसला भविष्य में आने वाले ऐसे तमाम मामलों के लिए एक बड़ी नजीर साबित होने वाला है।
बीमारी के कारण छोड़ी पहली पत्नी, गुपचुप रचा ली दूसरी शादी
यह पूरा कानूनी विवाद पूर्वी रेलवे के एक कर्मचारी से जुड़ा है। शख्स की 50 वर्षीय पहली पत्नी ने अदालत में बताया कि उसे मिर्गी के दौरे आते हैं, जिस वजह से उसके पति ने उसे बेसहारा छोड़ दिया। महिला का गंभीर आरोप था कि पति ने उसे बिना कोई जानकारी दिए और कानूनी रूप से बिना तलाक लिए ही दूसरी महिला से गुपचुप तरीके से शादी रचा ली। हद तो तब हो गई जब 31 दिसंबर, 2025 को रिटायरमेंट के बाद इस कर्मचारी ने अपनी सर्विस और पेंशन बुक से पहली पत्नी और अपने बेटे का नाम हटवा दिया। उनकी जगह पर उसने अपनी दूसरी पत्नी और उससे पैदा हुई 15 साल की बेटी का नाम दर्ज करा दिया।
रेलवे ने दिया था पेंशन को आधा-आधा बांटने का आदेश
पहली पत्नी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि साल 2012 से पहले उनके बीच गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) का केस चल रहा था। उस वक्त अदालत ने बेटे की परवरिश के लिए पति को हर महीने 1000 रुपये देने का आदेश दिया था। महिला के मुताबिक, 2012 के बाद से पति ने उन्हें एक भी पैसा नहीं दिया और उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपना जीवन काटा। इसके बाद महिला ने न्याय के लिए पूर्वी रेलवे के सामने अपनी गुहार लगाई। मामले की जांच के बाद रेलवे ने अपने फैसले में कहा था कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत दूसरी शादी पूरी तरह गलत है, इसलिए कानूनी रूप से पहली पत्नी और दूसरी शादी से पैदा हुई बेटी को ही पेंशन में आधा-आधा हिस्सा मिलेगा।
जज ने सुनाया अंतिम फैसला, बताया कौन है असली हकदार
रेलवे के इस फैसले से असंतुष्ट होकर पति ने अपने वकील के माध्यम से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पति के वकील ने दलील दी कि पहली पत्नी ने खुद उसे अलग किया था और वह खुद चाहती थी कि दस्तावेजों में दूसरी पत्नी का नाम रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि अदालत में तलाक का कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं किया गया है। ऐसे में कानूनी रूप से पहली पत्नी ही पेंशन की असली हकदार है। जज ने साफ किया कि शख्स की दूसरी शादी भले ही पूरी तरह अवैध है, लेकिन उससे पैदा हुई संतान का पिता की पेंशन पर पूरा हक है। इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि सर्विस और पेंशन बुक में पहली पत्नी के साथ-साथ दूसरी पत्नी की 15 वर्षीय बेटी का नाम भी शामिल किया जाए।

