एसआरएमयू में आयोजित ‘सस्टेनेबल इनोवेशन 2.0Ó विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ समापन
बाराबंकी ,11 अपै्रल (आरएनएस)। श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (एसआरएमयू) एवं इंटरनेशनल फैशन बिजनेस एक्सचेंज काउंसिल (आईएफबीईसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘सस्टेनेबल इनोवेशन-2.0Ó का शनिवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। ‘ब्रिजिंग रिसर्च एंड इंडस्ट्री फॉर रेजिलिएंट फ्यूचरÓ थीम पर आधारित इस सम्मेलन में देश-विदेश के कुल 700 विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 450 शोध पत्रों का वचन तथा 96 पोस्टर का प्रदर्शन किया गया, इसके साथ ही देश-विदेश के कुल 25 वक्ताओं ने भाग लिया जिसमें दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, संयुक्त राज्य अमेरिका, नेपाल और फीलिपंस के वक्ता भी शामिल थे। इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. अपूर्वा आनंद, ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा प्राकृतिक विज्ञान संकाय की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी, स्मार्ट टेक्सटाइल्स, क्लाइमेट-रेजिलिएंट इनोवेशन तथा सस्टेनेबल मटेरियल्स जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि शोध पत्रों में नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत किए गए, जिनमें उद्योग में सीधे लागू किए जा सकने वाले मॉडल शामिल थे। वहीं आईक्यूएसी की निदेशिका प्रो. ऋतु चंद्रा ने मीडिया, विधि, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा, प्रबंधन, संचार एवं अर्थशास्त्र से संबंधित सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन सत्रों में सस्टेनेबिलिटी के सामाजिक, आर्थिक एवं नीतिगत पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी, ग्रीन पॉलिसी, नैतिक फैशन, उपभोक्ता व्यवहार एवं डिजिटल मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में महिंद्रा एंड महिंद्रा के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर अंकित तोडी ने अपने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि उद्योगों को अब ‘प्रॉफिट विद पर्पसÓ के सिद्धांत पर कार्य करना होगा। उन्होंने कार्बन फुटप्रिंट कम करने, सर्कुलर इकोनॉमी को अपनाने तथा रिसोर्स एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अकादमिक संस्थानों के साथ साझेदारी से उद्योगों को नई दिशा और नवाचार मिल सकता है। आईएफबीईसी के फाउंडर विनीत पारिख ने अपने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शोध एवं उद्योग के बीच की दूरी को समाप्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और वैश्विक सहयोग को भविष्य की दिशा बताया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के चांसलर इंजी. पंकज अग्रवाल, प्रो-चांसलर इंजी. पूजा अग्रवाल एवं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सलाहकार अरुशी अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन समाज और उद्योग के लिए उपयोगी समाधान प्रदान करने में सहायक होते हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। सम्मलेन में मुख्य रूप से प्रो. नरेंद्र बहादुर सिंह, नेहा गुप्ता, प्रो. गजेंद्र सिंह, प्रो. अपूर्व आनंद, प्रो. रजाउर रहमान, प्रो. नीरजा जिंदल, प्रो. अश्वनी कुमार, प्रो. कृष्णा श्रीवास्तव, प्रो. ताबिश किदवई, प्रो. अमित सिंह, प्रो. प्राची भार्गव, प्रो. वी. एन. पाठक, सुश्री प्रुवा वर्मा, प्रो. आर. एस. बाजपेयी, प्रो. वीना सिंह, डॉ. मधु दीक्षित सहित सभी विभागों के डीन, डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
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