लखनऊ 29 अप्रैल (आरएनएस )। लगभग 170 एकड़ क्षेत्र में फैले सहारा शहर प्रकरण में नगर निगम लखनऊ को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सहारा कमर्शियल की ओर से दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय के इस निर्णय ने नगर निगम की कार्रवाई को वैध ठहराते हुए उसके पक्ष को मजबूत किया है और शहर प्रशासन की साख को और मजबूती प्रदान की है।गौरतलब है कि गोमतीनगर स्थित सहारा शहर को नगर निगम ने लीज की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में अपने कब्जे में लिया था। नगर निगम का कहना था कि वर्ष 1994 में हुई लीज के तहत निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया, साथ ही कई निर्माण एवं उपयोग संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया गया। विस्तृत जांच के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर के छहों प्रवेश द्वार सील कर दिए और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।इस कार्रवाई के विरोध में सहारा समूह ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए इसे मनमाना तथा प्रक्रिया के विपरीत बताया था। हालांकि नगर निगम ने न्यायालय में स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और विधिसम्मत तरीके से की गई है। निगम की ओर से यह भी बताया गया कि वर्ष 2020 और वर्ष 2025 में कई बार नोटिस जारी कर संबंधित कंपनी को सुधार का अवसर प्रदान किया गया था, लेकिन निर्धारित नियमों का पालन नहीं होने पर ही अंतिम कार्रवाई की गई।सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विस्तार से विचार किया। परीक्षण के बाद यह पाया गया कि नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की गई है। इसी आधार पर न्यायालय ने सहारा की याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय को नगर निगम के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सार्वजनिक भूमि और संसाधनों के संरक्षण के लिए की गई कार्रवाई न्यायिक कसौटी पर खरी उतरी है।इस पूरे प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित भूमि पर लीज की अवधि समाप्त होने और शर्तों के उल्लंघन के कारण नगर निगम को हस्तक्षेप करना पड़ा। लगभग 30 वर्ष की लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी निर्धारित विकास कार्य पूर्ण नहीं किए गए थे, जिससे प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े।इस मामले में नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन में अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, संपत्ति प्रभारी रामेश्वर प्रसाद, नायब तहसीलदार तेजस्वी तथा लेखपाल शक्ति वर्मा ने नगर निगम की ओर से सक्रिय भूमिका निभाई। अधिवक्ताओं के सहयोग से नगर निगम का मजबूत पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमें सभी आवश्यक अभिलेख, नोटिस और प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण रखा गया। इसी सशक्त पैरवी के परिणामस्वरूप नगर निगम को यह महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई।
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