*डीएम के जांच आदेश पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी
मीरजापुर। जिले के हलिया विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत मनिगढा में विकास कार्यों के नाम पर हुए वित्तीय घोटाले का मामला जोर पकड़ा जा रहा है, तो वहीं घोटाले की फाईलों को दबाएं बैठे ब्लाक स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी डीएम के आदेश को भी ठेंगा दिखाते हुए आएं हैं। बता दें कि मनिगढ़ा गांव में विकास कार्यों के नाम पर हुए भारी घोटाले और बिना धरातल पर कार्य कराएं ही कागजों में सरकारी धन खर्च दिखाकर हजम कर लिया गया है। इस बात का खुलासा होने पर तथा डीएम पवन कुमार गंगवार से इस संबंध में तीन सौ पन्नों का शिकायती पत्र सौंप कर जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी, जिसपर डीएम ने 28 अक्टूबर 2025 को उक्त शिकायत के आधार पर आदेश संख्या 3394/7/शिकायत जांच/2025-26 द्वारा जांच समिति गठित की गई थी। दुर्भाग्यवश, जांच समिति गठन के कई महीने बीत जाने के उपरांत भी न तो कोई जांच अधिकारी मौके पर स्थलीय जांच करने पहुंचा है और न ही शिकायतकर्ता को जांच तिथि की सूचना प्रदान की गई। इस बीच प्रधान, सचिव एवं बीडीओ हलिया द्वारा जांच को प्रभावित करने के लिए कृत्रिम फोटोग्राफ तैयार कर लीपा-पोती का भी प्रयास किया जा चुका है, ताकि मूल अनियमितताएं छुपाई जा रही हैं। ग्रामीणों ने मांग किया है कि गठित जांच समिति को तत्काल प्रभाव से स्थल निरीक्षण करने के लिए निर्देशित किया जाए, जांच के समय शिकायतकर्ता को पूर्व सूचना अनिवार्य रूप से प्रदान की जाए तथा जांच विलंब के कारण साक्ष्यों पर विपरीत प्रभाव पडऩे की संभावना के मद्देनजर दोषियों के विरुद्ध विधिक, अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही साथ संपूर्ण जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। दरअसल, यह पूरा मामला जिले के हलिया विकास खंड क्षेत्र के मनिगढ़ा गांव में हुए उस भारी विकास कार्यों से जुड़ा हुआ है जो धरातल पर हुआ ही नहीं है। जहां सरकार की विकास परक योजनाओं को पलीता लगाते हुए बिना कार्य कराएं ही भुगतान करा लिया गया है। इस मामले में गांव निवासी अब्दुल समद ने अक्टूबर 2025 में ही जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार को तीन सौ पेज का शिकायती पत्र सौंपकर गांव में लाखों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। मनिगढ़ा गांव निवासी अब्दुल समद ने जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्रक में आरोप लगाया था कि उनके घर के सामने स्थित पुराने कुएं के जगत के निर्माण के नाम पर दो बार में एक लाख से ऊपर का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन निर्माण नहीं कराया गया। कुआं और कुएं का जगत आज भी जस-तस हालात में पड़ा हुआ है। यही नहीं गांव के अन्य विकास कार्य मसलन, तालाब, कुआं, सड़क, मस्जिद इत्यादि के नाम पर भी कागजों पर तो काम करवा दिए गए हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। आरोप है कि महिला ग्राम प्रधान का पूरा लेखा-जोखा, लेन-देन कोई और करता है। महिला प्रधान को यह भी पता नहीं है कि उसके गांव के विकास कार्य पर कितनी धनराशि खर्च की गई है और कहां कहां खर्च किया गया है। गांव के विकास कार्य के नाम पर लाखों रुपये गबन करने की आशंका जताते हुए कहा गया है कि बिना कार्य कराए ही कागज पर कार्य पूर्ण दिखाकर रुपये निकाल लिए गए हैं। डीएम ने जांच कराके कारवाई का आश्वासन दिया था। डीएम ने इस संबंध में डीपीआरओ को निर्देशित किया था और टीम गठित कर मामले की जांच कर तत्काल रिपोर्ट सौंपी जाए के निर्देश भी दिए थे, लेकिन डीएम के टीम गठित करने के चार-पांच-माह गुजरने के बाद भी मौके पर न तो जांच टीम के अधिकारी पहुंचे हैं और ना ही कोई कार्रवाई शुरू की गई है। ग्रामीणों सहित शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि जिलाधिकारी से हुई शिकायत और जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच टीम गठित करने के बाद मौके पर किसी भी अधिकारी का ना जाना भारी भ्रष्टाचार की ओर इंगित करता हुआ दिखाई दे रहा है।
गौरतलब हो कि वर्ष 2007-2010 में राज्य के कई जिलों में हुए मनरेगा योजना नि अन्तर्गत घोटाले में मीरजापुर का हलिया विकास खंड क्षेत्र भी शामिल रहा है यहां के 54 लोगों जिनमें कई अधिकारी कर्मचारी और ग्राम प्रधान इस भ्रष्टाचार घोटाले की जांच में घिरे थे, मुकदमा दर्ज कराया गया था।
इनसे मैटर–
*जांच टीम को दस्तावेज सौंपने से क्यों पीछे भाग रहे प्रधान, सचिव व बीडीओ*
बताते चलें कि जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियों एवं पंचायत लेखा परीक्षा मीरजापुर बैजनाथ सिंह राठौर ने अपने पत्रांक-1932-20 मार्च 2026 में पुन: खंड विकास अधिकारी हलिया को पत्र लिखकर जिलाधिकारी से मनिगढ़ा गांव में प्रधान द्वारा विकास कार्यों में व्यापक धांधली की शिकायत की जांच के संदर्भ में अवगत कराते हुए उल्लेखित बिंदुओं के अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने पूर्व में पत्रांक 1245-52 दि.1 नवंबर 2025 एवं पत्रांक 1752-59 दि. 20 जनवरी 2026 का उल्लेख करते हुए लिखा है कि ग्राम पंचायत मनिगढ़ा के सचिव द्वारा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण ग्राम पंचायत का भौतिक सत्यापन एवं अभिलेखी जांच नहीं की जा सकी। इसी के साथ ही खंड विकास अधिकारी से ग्राम पंचायत सचिव को निर्देशित करते हुए शिकायत से संबंधित बिन्दुओं के अभिलेख, पत्रावली जांच दल को तीन दिन में उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया था। लेकिन तकरीबन डेढ़ माह बीतने के बाद भी इस संदर्भ में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और ना ही जांच टीम मौके पर पहुंची है। अलबत्ता पूछे जाने पर जांच टीम के अधिकारी ने टका सा जवाब दिया है कि, “दो-दो बार तारीख़ दी गई है, लेकिन प्रधान, सचिव और बीडीओ संबंधित दस्तावेज नहीं दे रहे हैं।”
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

