नेग पर फैसले से नाराज किन्नर समाज, उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने की तैयारी
पप्रयागराज 1 मई (आरएनएस)। उच्च न्यायालय के हालिया फैसले को लेकर किन्नर समाज में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंदगिरि ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में समाज की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हो सकी, जिसके कारण उनका पक्ष न्यायालय के समक्ष पूरी मजबूती से नहीं रखा जा पाया।
उन्होंने कहा कि फैसले में किन्नर समाज की परंपराओं और सामाजिक भूमिका को सही संदर्भ में नहीं समझा गया। किन्नर समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी प्रकार की जबरन वसूली नहीं करते, बल्कि विवाह, जन्म या अन्य खुशी के अवसरों पर पारंपरिक रूप से “नेग” प्राप्त करते हैं। यह प्रथा वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे समाज में सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाता रहा है। उनका तर्क है कि इस परंपरा को गलत तरीके से प्रस्तुत करना पूरे समुदाय की छवि को प्रभावित करता है। हालांकि समाज के लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि हर वर्ग की तरह उनके समुदाय में भी कुछ असामाजिक तत्व हो सकते हैं, लेकिन कुछ व्यक्तियों के कृत्यों के आधार पर पूरे समाज को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि किन्नर समाज का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और धार्मिक ग्रंथों में भी उनका उल्लेख सम्मान के साथ मिलता है। समाज के पदाधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे इस निर्णय को उच्च स्तर पर चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि अपनी परंपराओं और अधिकारों की रक्षा की जा सके। साथ ही उन्होंने आम जनता से अपील की है कि किन्नर समाज के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव बनाए रखें, क्योंकि आज भी यह समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
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