अहमदाबाद,02 मई (आरएनएस)। नाबालिग रेप पीडि़तों के अधिकारों और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक अहम फैसले में, गुजरात हाई कोर्ट ने 16 साल की एक नाबालिग को अपना 22 हफ्ते का गर्भ गिराने की इजाजत दे दी है.
16 साल की एक लड़की ने रेप की वजह से अपनी प्रेग्नेंसी खत्म करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले में आरोपी के खिलाफ वटवा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है. मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, हाई कोर्ट ने अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल को मेडिकल जांच करने और एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया.
कोर्ट में जमा की गई मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भपात में आम तौर पर होने वाले जोखिमों के बावजूद, मेडिकल तौर पर गर्भपात संभव है. इसी आधार पर, हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात करवाने की इजाजत दे दी है.
कोर्ट ने एक अहम निर्देश देते हुए कहा कि गर्भपात करने से पहले नाबालिग की सहमति लेना जरूरी होगा. इसके साथ ही, भ्रूण का डीएनए सैंपल जांच अधिकारी को सौंपना होगा, ताकि अपराध की जांच में मदद मिल सके.
कोर्ट ने आगे कहा कि अगर गर्भपात के दौरान बच्चा जिंदा पैदा होता है, तो उसे पूरा इलाज और देखभाल दी जाएगी. अगर नाबालिग बच्चे को नहीं रखना चाहती है, तो जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मामले में, याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील झलक सुथार ने कोर्ट के सामने दलील दी कि नाबालिग की मानसिक और शारीरिक हालत को देखते हुए गर्भपात की इजाजत देना बेहद जरूरी है. उन्होंने कोर्ट के इस फैसले को पीडि़ता के हित में अहम बताया.
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